छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर समेत कई इलाको में चाँद नज़र आया। चारो तरफ सायरन की आवाज़ें और चाँद दिखने की ख़ुशी छई हुई है।
दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय ईद-अल-फितर के पवित्र त्योहार को मनाने की तैयारी में जुटा है। सऊदी अरब में 30वें रमजान का चांद देखते हुए गुरुवार को शावाल की पहली तारीख़ को ईद मनाई गई । उलेमाओं ने मुसलमानों से बुधवार को ईद का चांद देखने की अपील की थी पर भारत में चाँद की तस्दीक नहीं हुई । इसलिए भारत में शुक्रवार को ईद मनाई जाएगी।
ईद-उल-फितर का त्योहार चांद के निकलने पर निर्भर करता है। इस वर्ष चांद अगर 12 मई यानी बुधवार को निकलता है तो उसके अगले दिन 13 मई यानी गुरुवार को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। चांद 13 मई को दिखा है, तो पूरे देश में ईद-उल-फितर का त्योहार 14 मई दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। सही तारीख का निर्धारण चांद के निकलने पर ही निर्भर होता है।
दरअसल, इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित है। चांद के दिखाई देने पर ही ईद या प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। रमजान के पवित्र माह का प्रारंभ चांद के देखने से होता है और इसका समापन भी चांद के निकलने से होता है। रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है।
मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद साहब के नेतृत्व में जंग-ए-बद्र में मुसलमानों की जीत हुई थी। जीत की खुशी में लोगों ने ईद मनाई थी और घरों में मीठे पकवान बनाए गए थे। इस प्रकार से ईद-उल-फितर त्योहार का प्रारंभ जंग-ए-बद्र के बाद से ही हुआ था। ईद-उल-फितर के दिन लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। उनका मानना है कि उनकी ही रहमत से वे पूरे एक माह तक रमजान का उपवास रख पाते हैं। आज के दिन लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों में बांट देते हैं। उनको उपहार में कपड़े, मिठाई और भोजन आदि देते हैं।



