आपका नाम अब्दुल्लाह बिन अबी क़ुहाफा, कुन्नियत अबू बकर और वाक़या मेराज की तसदीक़ करने से लक़ब सिद्दीक़ हुआ। हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नबी बनाए जाने के रोज़ ही हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहु अन्हा के बाद सबसे पहले इस्लाम क़बूल किया। इनकी तबलीग से बेशुमार सहाबा इस्लाम लाए जिनमें बाज़ अहम नाम यह हैं, हज़रत उसमान गनी, हज़रत ज़ुबैर बिन अवाम, हज़रत अब्दुर रहमान बिन औफ, हज़रत तल्हा बिन उबैदुल्लाह और हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अन्हुम। इस्लाम लाने के बाद से मौत तक पूरी ज़िन्दगी एलाए कलेमतुल्लाह और एहयाए इस्लाम में लगा दी। अल्लाह तआला के अता करदा माल को अल्लाह तआला के रास्ते में आप बड़ी सखावत और फरावानी से खर्च करते थे, मसलन बेशुमार गुलामों को खरीद कर आज़ाद किया जिनमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुअज़्ज़िन हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु भी हैं। आपकी साहबज़ादी हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा से नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहु अन्हा के इंतिक़ाल के बाद निकाह फरमाया। आपने मदीना की तरफ हिजरत नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ की। क़ुरान करीम की आयत (सूरह तौबा 40) में हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु का ज़िक्र है। नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुकुम से नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात से पहले चंद नमाजें हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु ही ने इमामत करके सहाबा को पढ़ाईं। इंतिक़ाल के दिन हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ मिलकर नमाज़े फजर की इमामत की। हज की फर्ज़ियत के बाद 9 हिजरी में हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु को सफरे हज के लिए सहाबए किराम का अमीरे लश्कर बना कर भेजा।
हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु अरब के मुमताज़ ताजिरीन और अमीर लोगों में शुमार किए जाते थे, क़बूले इस्लाम से पहले पाकीज़ा अखलाक और अच्छे औसाफ से अल्लाह तआला ने नवाजा था। जब इस्लाम का सूरज तुलू हुआ तो जज़्बाए सखावत मज़ीद परवान चढ़ा और इस्लामी तारीख में आपकी फय्याज़ी व सखावत एक मिसाल बन गई।
हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु के बेशुमार फज़ाइल हैं, एक फज़ीलत पेश है, हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु के मुतअल्लिक़ इरशाद फरमाया बेशक सबसे ज़्यादा अपनी रिफाकत और माल से मुझ पर एहसान करने वाले अबू बकर हैं और अगर मैं अल्लाह के सिवा किसी को दोस्त बनाता तो अबू बकर को बनाता, लेकिन उनसे इस्लाम की उखुव्वत और मोहब्बत है और मस्जिद में सिवाए अबू बकर के और किसी की खिड़की न बाक़ी रखी जाए। (सही बुखारी)
हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के बाद सहाबए किराम के मशवरे से आपको खलीफा बनाया गया। आपकी खिलाफत के चंद अहम काम यह हैं:
― हज़रत उसामा बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हु के लश्कर को मुल्के शाम रवाना किया जो क़ैसर की फौज को शिकस्त देकर सही सालिम वापस आया।
― मुरतदीन, ज़कात न देने वाले और दाइयाने नुबूवत से क़िताल करके नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के बाद पैदा हुए तमाम फितनों को खत्म किया।
― मज़कूरा फितनों को खत्म करने में बेशुमार हुफ्फाज़े किराम शहीद हुए, चुनांचे हज़रत उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की राय पर आपने क़ुरान करीम को एक जगह जमा कराया।
हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु का 22 जुमादस सानी 13 हिजरी में इंतिक़ाल हुआ, इस्लाम में दाखिल होने के वक़्त आपका शुमार मक्का के बड़े ताजिरों में होता था लेकिन सारी दौलत अल्लाह के रास्ते में लगादी हत्ताकि इंतिक़ाल के वक़्त कोई क़ाबिले ज़िक्र चीज़ आपके पास मौजूद नहीं थी। हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा के हुजरे में नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पहलू में दफन हुए। आपकी उम्र तक़रीबन 63 साल और खिलाफत 11 हिजरी से 13 हिजरी तक दो साल तीन महीने दस दिन रही।