पूर्ण शराबबंदी संकल्प के समर्थन में सिर्फ 13 विधायक, विरोध में आए 58 विधायक

रायपुर. CG Assembly Monsoon Session: विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण शराबबंदी (Complete Liquor Ban) पर भाजपा ने अशासकीय संकल्प रखा। जिसे लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्तापक्ष ने अपने तर्क रखे, मगर विपक्ष सहमत नहीं हुआ। जब बात ‘हां’, ‘ना’ की काउंटिंग प्रक्रिया से नहीं बनी तो विपक्ष की मांग पर अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मत विभाजन करवाया और इस प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ 13 और विरोध में 58 मत पड़े। संकल्प अस्वीकृत कर दिया गया।

भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने 1 जनवरी 2022 से पूर्ण शराबबंदी का अशासकीय संकल्प पेश किया। शिवरतन ने कांग्रेस के चुनावी घोषणा-पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इन्होंने हाथ गंगा जल लेकर पूर्ण शराबबंदी की बात कही थी। जिस पर तत्काल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि शिवरतन ने अपनी बात ही असत्य से शुरू की है। इन्हें ट्रेनिंग ही यही मिली है कि किसी झूठ को 100 बार बोलें कि वह सच लगने लगे।

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इन्होंने गिरीश देवांगन के लेटरपैड पर शैलेश नितिन के फर्जी दस्तखत कर पत्र वायरल किया था। जिसके चलते हमने 2500 रुपए देने के लिए गंगाजल लेकर कसम खाई थी। शिवरतन ने कहा कि शराब की वजह से ही अपराध बढ़ रहे हैं। परिवार टूट रहे हैं। अब तो सरकार ने 2020-21 में शराब से 5200 करोड़ रुपए पाने का लक्ष्य रखा है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि शराबबंदी को लेकर बनाई गई समितियों की उनकी बैठकें तक नहीं हुई।

आबकारी मंत्री की जगह वन मंत्री मो. अकबर ने विपक्ष के हमलों का जवाब दिया। कहा कि केंद्र ने विदेशों से काला धन लाकर 15-15 लाख रुपए लोगों के खातों में जमा करने की बात कही थी। आपकी सरकार ने हर आदिवासी परिवार को गाय और एक नौकरी देने का वादा किया था। उसका क्या हुआ? उन्होंने कहा कि राजनीतिक समिति में भाजपा, जकांछ से विधायकों के नाम मांगे गए थे, आज तक नहीं दिए।

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अरबी और हल्बी लेकर हुआ कन्फ्यूजन
शिवरतन शर्मा ने कहा कि अरबी में शराब को खराब पानी कहा जाता है। इसे लेकर आबकारी मंत्री कवासी लखमा भड़क उठे। उन्होंने अरबी को हल्बी समझ लिया और कहा कि मैं हल्बी जानता हूं, उसमें यह नहीं कहते। यह आदिवासियों का अपमान है। जिस पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे अरबी की बात कर रहे हैं। मंत्री को फिर हल्बी सुनाई दिया। वे फिर से विरोध करने लगे। अंत में अध्यक्ष डॉ. महंत को खड़े होकर सबको शांत करवाना पड़ा। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा,’गालिब शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर या मुझे कोई ऐसी जगह बता जहां खुदा ना हो। इस पर क्या कहेंगे आप?’

विपक्ष के आरोप, सरकार के तर्क
आरोप- समितियों के गठन का क्या औचित्य। जब घोषणापत्र में पूर्ण शराबबंदी लिखा था।
जवाब- 3 समितियां बनाई गई हैं। इनकी बैठकें भी हुई हैं। कई राज्यों ने शराबबंदी लागू की गई मगर सफल नहीं हुई।

आरोप- कोरोना काल में सरकार ने शराब की होम डिलिवरी करवाई।
जवाब- लोगों ने सेनिटाइजर, स्पिरिट पीकर जानें दीं। जिस पर निर्णय लिया।

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