

जीवन की गति के साथ कोरोना ने राज्यभर में बसों के पहिये भी रोक दिए हैं। पिछले साल मार्च से राज्य के अंदर बसों का संचालन ठप है। बीच में कुछ रूट पर शुरू हुआ तो कुछ ही महीनों में फिर थम गया। हालत ऐसी है कि कोरोनाकाल में बस नहीं चलती है तो हर महीने करीब 100 करोड़ के नुकसान और रोजी-रोटी का संकट है। बस चलाई जाती है तो संक्रमण फैलने का डर है।
13 जिलों का हाल… जिलों व कई राज्यों के बीच बस सेवा ठप, संचालक बोले- ऐसा ही रहा तो किस्त चुकाने बेचनी होगी जायदाद
अंबिकापुर; हर महीने 5 करोड़ का कारोबार ठप, 350 बसें थमीं
सरगुजा जिले में 350 बसें खड़ी हैं। इससे लोगों को जहा आने जाने में परेशानी हो रही है। वहीं 5 करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। इसमें करीब 2 करोड़ शासन को मिलने वाली रायल्टी भी है। बसों के नहीं चलने से ड्राइवर,कंडक्टर, खलासी सहित करीब 5 हजार लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
कोरिया; 200 एजेंट्स के रोजी रोटी पर संकट, 50 बसें थमीं
जिले में करीब 50 बसें खड़ी हैं। करीब 60 ड्राइवर, 50 कंडक्टर, 50 खलासी समेत 200 से अधिक एजेंट्स के रोजी रोटी पर संकट आ गया है। बस बंद होने से नई बसें चलाने वाले संचालको के सामने किस्त, फिटनेस, इंश्योरेंस का भुगतान करना मुश्किल भरा बना हुआ है। 2 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित है।
कोरबा; माह में 2 कराेड़ का व्यवसाय प्रभावित, 130 बसें थमीं
जिले के अन्य क्षेत्राें के अलावा दूसरे जिलाें के लिए 130 बसें चलती है। लाॅकडाउन में सभी 130 बसें खड़ी है। जिससे प्रति माह 2 कराेड़ रुपए का व्यवसाय प्रभावित हाे रहा है। ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी और कुली समेत 4 साै लाेगाें के सामने परिवार चलाना मुश्किल हाे रहा है।
रायगढ़; 3 करोड़ का परिवहन कारोबार ठप, 400 बसें थमीं
लॉकडाउन होने की वजह से लोग कहीं भी आना-जाना नहीं कर रहे हैं, इसकी वजह से बसे खड़ी हुई हैं। अभी सीधे तौर पर 12 सौ लोग जो बस परिवहन से जुड़े हुए हैं। सारंगढ़ में ही ओडिशा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग जैसे रूट में 150 गाड़ियां चलती हैं।

जशपुर; बस से जुड़े 1000 कर्मी बेरोजगार 150 बसें थमीं
जिले में यात्रियों को आने-जाने के लिए केवल बस परिवहन ही एकमात्र सहारा है। जिले से विभिन्न मार्गों में चलने वाली 150 बसें चलती है।जिनसे 1000 हजार लोगो को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। बसों के संचालन रुकने से उनकी रोजी – रोटी पर बुरा प्रभाव पड़ा है। बस व्यवसाय से जुड़े लोगो का कहना है कि, पहियों के थमने से बस मालिक, ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी, पार्ट्स व्यवसायी, बुकिंग एजेंट भुखमरी की हालत में आ गए हैं।
जांजगीर; 2 करोड़ से अधिक का नुकसान, 268 बसें थमीं
13 अप्रैल से लॉकडाउन के बाद से बसों के पहिए थम गए हैं। बस ऑपरेटर संघ के जिला अध्यक्ष मन्ना सिंह ने बताया जिले में 24 से ज्यादा बस मालिकों के पास करीब 268 बसें है। सभी बसें 13 अप्रैल के बाद से खड़ी हुई है। बस परिवहन सेवा बंद होने से प्रतिदिन साढ़े सात लाख रुपए का नुकसान बस ऑपरेटरों को हो रहा है। बीते 25 दिनों में करीब दो करोड़ का नुकसान बस संचालकों को हुआ है।
कवर्धा; एक हजार से अधिक लोग बेरोजगार, 300 बसें थमीं
जिले में चलने वाली यात्री बस बंद हैं। बस संचालन से जुड़े लगभग एक हजार कर्मचारी अब बेरोजगार हो गए है। बस मालिक संघ के जिला अध्यक्ष करन बंजारे ने बताया कि कोरोना के कारण कबीरधाम जिले से कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, मुंगेली, बेमेतरा समेत जिले के भीतर चलने वाली सभी बस 11 अप्रैल से बंद है। लॉकडाउन से पहले जिले से करीब 300 से अधिक बस चला करती थी।
राजनांदगांव; 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित, 350 बसें थमीं
लॉकडाउन के चलते 350 बसों के पहिए थम गए हैं। इसकी वजह से हर महीने 30 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हर एक बस के पीछे करीब 10 लोगों को काम मिलता है। 3500 से अधिक लोग बेरोजगार भी हो गए हैं। बस ऑपरेटर्स संघ के अध्यक्ष रईस अहमद शकील, शिरीष मिश्रा सहित अन्य संचालकों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या टैक्स और बसों की किस्त को लेकर खड़ी हो गई।
बालोद; टायर, स्टेयरिंग सहित कई पार्ट्स खराब, 112 बसें थमीं
112 बसें वर्तमान में खड़ी हैं। 7 अप्रैल से बसों के पहिए थमे है। बस एम्पलाइंज सोसायटी के अध्यक्ष शेख इमरान ने बताया कि बसों की सीट खराब होकर उखड़ गई है, टायर, स्टेयरिंग सहित कई पार्टस भी खराब हो रहे है। बस के अंदर कचरों का ढेर है। कई पार्टस की चोरी भी गई है। ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी सहित 800 लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। करीब 16 लाख का कारोबार प्रभावित है।
धमतरी; 22 से 25 लाख रुपए का व्यवसाय ठप, 200 बसें थमीं
लॉकडाउन लगने के कारण जिले में करीब 200 बसें खड़ी हैं। इनके खड़े हाे जाने के कारण 22 से 25 लाख रुपए मासिक का व्यवसाय ठप हाे गया है। बसें भी खड़े-खड़े खराब हाे रहीं हैं। जिले में 11 मई रात 12 बजे से सभी 200 बसें खड़ी है। इस बंदी से 600 ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी समेत 5000 लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।
महासमुंद; 88.80 लाख रुपए का नुकसान, 185 बसें थमीं
पिछले एक महीने में जिले के ऑपरेटर्स को करीब 88.80 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। जिले में कुल 185 बसें हैंं। बस मालिकों ने परमिट (आई फाॅर्म) परिवहन विभाग को सरेंडर कर दिए हैं। इससे टैक्स में तो राहत है, लेकिन आर्थिक रूप से हानि हो रही है। बस एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चंद्राकर, बस मालिक दिलीप जैन और बसंत राठौर बताते हैं कि 275 से अधिक परिवारों के सामने इन दिनों रोजी-रोटी का संकट है। बस चालक संघ के पदाधिकारी भीखम यादव ने बताया कि जिले में 250 ड्राइवर और कंडक्टर हैं। इसके साथ 25 हेल्पर हैं, जो बेरोजगार हो चुके हैं।
कांकेर; 170 की जगह चल रहीं सिर्फ 5-7 बस, 170 बसें थमीं
लॉकडाउन में बस के आवागमन पर रोक तो नहीं है लेकिन यात्री नहीं मिलने जिले के अंदर चलने वाली बस सेवाएं बंद हो गई है। लाकडाउन लगते ही कांकेर से नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, पखांजुर, दुधावा-नगरी मार्ग में बसों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। केवल रायपुर-जगदलपुर मार्ग में ही दो ट्रेवल्स कंपनियों की 5-7 बसें चल रही है। 10 से 15 मिनट की जगह अब डेढ़ से दो घंटा में बस मिलती है। पहली बस 6.30 बजे कांकेर से रायपुर के लिए छूटती थी लेकिन अब सुबह 10 बजे से पहले बस नहीं है। पहले रायपुर रूट पर 100 बसें रोजाना तथा अन्य मार्ग में 70 बसें चलती थी।
जगदलपुर; 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित, 120 बसें थमीं
लॉकडाउन के चलते बस्तर संभागीय मुख्यालय से चलने वाली करीब 120 बसों की आवाजाही बंद पड़ी है। इसके कारण जहां करीब 650 कर्मचारियों की रोजी-रोटी छिन गई है तो वहीं दूसरी ओर 30 करोड़ रुपए का कारोबार इसके चलते प्रभावित हुआ है। बसों की आवाजाही नहीं होने से सबसे अधिक परेशानी दक्षिण बस्तर के लोगों को हो रही है। रायपुर से इस समय केवल चार बसों की आवाजाही हो रही है। बस्तर प्राइवेट बस एसोसिएशन और ओम नारायण बस ट्रेवल्स के संचालक अनुज सिंह ने बताया कि बस मालिक 3-4 महीने की किस्त जमा नहीं कर पाए हैं।
समझिए… 100 किमी में होता है 2500 तक का मुनाफा
अंतर जिला चलने वाले बसों के 100 किमी के एक फेरे से 2500 तक मुनाफा मिलता है। इसमें ड्राइवर, कंडक्टर और खलासी सहित अन्य का दैनिक भत्ता अतिरिक्त होता है।
एक बस दो फेरे लगाती है तो मुनाफा 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता है । लेकिन लॉकडाउन के चलते बसें बंद पड़ी है। इससे रोजाना उन्हें इसका नुकसान हो रहा है।
वहीं हर बस के पीछे काम करने वाले कम से कम 10 कर्मचारी भी इन दिनों बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट बना खड़ा हो रहा है
