20 अगस्त से पंडरी बस स्टैंड में बसों के आवाजाही से व्यापारी पूरी तरह बेबस,प्रसाशन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही।

पंडरी स्थित बस स्टैंड में 20 अगस्त से बसों की आवाजाही पूरी तरह से बंद होने जा रही है पर इसका वहां के व्यापारियों पर जो असर होगा उस पर प्रशासन की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हो रही है उन्हें प्रशासन ने जैसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है 12 दर्जन से अधिक व्यापारी पूरी तरह से अपना रोजगार खो देंगे लेकिन सिर्फ नहीं बस स्टैंड का उद्घाटन करना ही हमारी छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता में नजर आ रहा है विस्थापन होने पर 12 दर्जन से अधिक व्यापारियों का रोजगार छिन जाएगा इस ओर प्रशासन के तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं ना ही कोई प्रबंध ताकि वह अपनी रोजी-रोटी चला सके इसका भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है व्यापारियों की मांग केवल यह है कि जिस तरह पुराने बस स्टैंड के विस्थापन के समय उन्हें ध्यान में रखा गया उसी तरह से इस बार भी उनकी तरफ प्रशासन का ध्यान हो ताकि वह अपने परिवार का जीवन यापन कर सकें इस बस स्टैंड में छोटे छोटे व्यापारी ना कि कोई बड़ा व्यापारी जिसकी लाखों का व्यापार हो मुश्किल से गुजर बसर कर पाने वाले यह सारे व्यापारी गरीबी रेखा के नीचे ही है कुछ तो पंचर बना कर और कुछ पान की पान ठेले के जैसी छोटी छोटी गुमटी लगाकर अपनी जीवन बसर करता है लेकिन नए इंटर स्टेट बस स्टैंड में इन छोटे छोटे दुकानदारों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सिर्फ 12 दुकाने जिनमें नाही कोई छोटा दुकानदार हो ना ही कुछ जैसे एयरपोर्ट में आप देखते हैं मॉल सिस्टम वैसे ही तैयारियां शुरू है कि अगर किसी को चाय भी पीना है तो वह उसे भी ₹25 खर्च करने होंगे लेकिन पुराने बस स्टैंड में अगर कोई गरीब को भी चाय पीना हो तो वह ₹5 में चाय पी सकता था अगर किसी को छोड़ते हुए किसी की गाड़ी पंचर हो जाए तो भी वहां अपनी गाड़ी की रिपेयरिंग करा सकता था पंचर बनवा सकता था लेकिन नए इंटर स्टेट बस स्टैंड में यह सब सुविधाएं नहीं होंगी वहां पर अगर किसी को छोटी मोटी परेशानी भी हुई तो उसे अपनी जेब ढीली करनी होगी ऐसे ही सेंट्रल गवर्नमेंट ने पेट्रोल के दामों में इतनी वृद्धि कर दी है साथ ही बसों के किराए को भी दुगना कर दिया गया है और और तो और घर में जब खाना पकाना भी महंगा कर दिया गया है तेल और गैस की कीमतों को बढ़ाकर तो हमारी राज्य सरकार हम पर ऐसा बोझ डाल रही है जोकि एक आम व्यक्ति के बसों के जाने आने जैसे मूलभूत अधिकार को भी वीआईपी कल्चर में ढाल रही है यह कहां तक सही है इसका अंदाजा आप खुद भी लगा सकते हैं अगर सरकार चाहे तो इन छोटी-छोटी चीजों को जो कि सीधे उनके प्रदेश की गरीब जनता असहाय जनता जो कि इस करोना काल में छोटी छोटी चीजों के लिए भी सोच सोच कर कदम उठा रही है।

उनके लिए यह ही सोच ले की बस स्टैंड जैसा कि पहले चला करता था जहां की रौनक वहां के छोटे छोटे दुकानदार हुआ करते हैं जोकि पहले ही जानते हैं की आने वाले मुसाफिर को किन-किन चीजों की जरूरत है महसूस होंगी और उसका पूरी तरह से प्रबंध करके रखते हैं और वह भी उचित मूल्य में ना कि मॉल कल्चर जैसी प्रणाली में जो कि लोगों का दम निकाल दे आज भले ही पूरी दुनिया पाश्चात्य सभ्यता में अपने आप को बदल रही है लेकिन हमारी संवेदनशील सरकार जोकि गरीबों के हित के बारे में सोचती है गरीबों के हर कदम में उनके साथ हैं अगर वह भी ऐसे कदम उठाएं तो दबी हुई कुचली हुई जनता किससे सहारा ले।

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