रायपुर। रायपुर नगर पालिका निगम में एमआईसी की बुधवार को बैठक होगी. इस बैठक में कुल 11 एजेंडों पर चर्चा होगी. जानकारी के मुताबिक, इन एजेंडों में सिंगल विंडो की ऑनलाइन व्यवस्था देने की योजना भी शामिल है. इससे लोगों को अधिकारी के चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा. शहर में 11 करोड़ के लागत से बनने वाले ऑक्सीजोन का मुद्दा भी एजेंडा में शामिल किया गया है.
नगर पालिका निगम के महापौर ढेबर ने बताया कि कल एमआईसी की बैठक है और बैठक में 11 अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होगी. चर्चा के बाद इन प्रस्तावों पर मुहर लग जाएगी
यह जो 11 अलग-अलग एजेंडा है, यह जनहित से जुड़ा हुआ है. इनमें से एक तेलीबांधा ऑक्सीजोन है, जो लॉकडाउन की वजह से काम प्रभावित रहा है. 11 करोड़ में ऑक्सीजोन बनाया जा रहा है.
वहीं सिंगल विंडो का प्रावधान रखा गया है, जिसमें आम जनता को अब तक निगम कार्यालय या अधिकारियों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है. सभी काम ऑनलाइन होंगे. ख़ासकर मूलभूत सुविधाओं से जुड़े राजस्व प्रमाण पत्र इस तरह के सारे काम ऑनलाइन किया जाएगा.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को घर से उठाकर पुलिस हिरासत में लिए जाने की बात कही थी. जिस कारण डीएड बीएड संघ ने आंदोलन को स्थगित कर दिया. अब रायपुर पुलिस ने रमन सिंह के ट्वीट का जवाब दिया है. रायपुर पुलिस ने कहा कि जानकारी सही नहीं है. शिक्षक भर्ती के किसी भी अभ्यर्थी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
पूर्व सीएम रमन सिंह ने सोमवार को ट्वीट कर कहा था कि मुझे सूचना मिली है कि शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थी 8 जून को आंदोलन करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को घर से उठाकर हिरासत में ले लिया. @bhupeshbaghel जी असहमति और अभिव्यक्ति की आवाज़ को दबाकर लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं. बेहद शर्मनाक
14 हजार 580 शिक्षक भर्ती का है पूरा मामला
पिछले 27 महीने से नियुक्ति धारी शिक्षक बेरोज़गार है. नियुक्ति पत्र दे दिया गया है, लेकिन नियुक्ति नहीं दी जा रही है. इसलिए आज डीएड बीएड संघ राज्यस्तरीय प्रदर्शन करने वाले थे. लेकिन प्रशासनिक दबाव के बीच आंदोलन को रद्द करना पड़ा. शिक्षक संघ करीब ढाई साल से नौकरी दिए जाने की मांग कर रहा है.
बीएड डीएड संघ के प्रदेश अध्यक्ष दाउद खान ने बताया कि प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षकों का चयन हो चुका है, मगर भर्ती नहीं हो रही. इससे पहले सभी शिक्षक किसी न किसी प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर रहे थे, सभी ने इस आस में नौकरी छोड़ दी कि उन्हें सरकार की तरफ से रोजगार मिलना था. अब कोई दूसरी नौकरी इसलिए नहीं मिलती क्योंकि ये उम्मीदवार चयनित हैं, लॉकडाउन में सभी शिक्षकों की माली हालत और भी खराब हो गई मगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया
रायपुर। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आज राज्यपाल से मुलाकात की. इस दौरान प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के साथ हो रहें अत्याचार, अनाचार व हत्या की घटनाओं की जानकारी दी. प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल अनुसुइया उइके को 4 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा. इसमें राज्य सरकार पर मामलों को दबाने का आरोप लगाया गया है. घटनाओं की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन करने, जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, दुष्कर्म पीड़िता को 25 लाख रुपए की सहायता राशि एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है.
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष नवीन मार्कण्डेय ने कहा कि हमने राज्यपाल से भेंट की. उन्हें बताया कि प्रदेश में लगातार अनुसूचित जाति वर्ग के मां बहनों के ऊपर जो अत्याचार हो रहे हैं, दुष्कर्म हो रहे हैं या जो सामूहिक हत्या हुई है, उस पर अभी तक कोई जांच नहीं बैठाया गया है.
बलौदाबाजार जिले में दुष्कर्म की घटना में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया है. यह सब प्रशासन की घोर लापरवाही है. ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करने का प्रयास सरकार और प्रशासन कर रही हैं, हम उन सारी चीजों को यहां न्यायिक जांच आयोग का गठन करने, मुआवजे के रूप में आर्थिक रूप से उनको 25 लाख रुपए पीड़ित परिवार को सहायता दिया जाए. उनके परिवार को योग्यता अनुसार से नौकरी दिया जाए. अपराध की गंभीरता को देखते हुए मामले में जिसने लापरवाही किया उस अधिकारी पर कार्रवाई किया जाए.
{{{खुलासा छत्तीसगढ़}}} रायपुर। छत्तीसगढ़ में तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. दुर्ग-भिलाई के तृतीय लिंग समुदाय के सदस्यों ने महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया से शिकायत की है. उन्होंने तृतीय लिंग बोर्ड की मेंबर कंचन सेंद्रे को हटाने की मांग की है.
बेचा जा रहा सरकारी राशन
तृतीय लिंग समुदाय का आरोप है कि सरकारी राशन का वितरण अन्य समुदाय के लोगों को किया जा रहा है. उन्हें दी जाने वाले सरकारी राशन को बेचा जा रहा है. थर्ड जेंडर समुदाय को मिलने वाले आवास को भी रद्द करा दिया गया है. कंचन सेंद्रे के खिलाफ समुदाय के लोगों ने की शिकायत की है.
कंचन सेंद्रे समुदाय के लोगों को कर रही गुमराह
पूजा चौधरी ने बताया कि प्रशासन की कोई भी योजना थर्ड जेंडर समुदाय के लोगों को उपलब्ध नहीं हो रही है. सरकार की काफी योजनाएं हमारे समुदाय के लोगों को मिल रही है, लेकिन हमें नहीं मिल रही है. तृतीय लिंग बोर्ड की मेंबर कंचन सेंद्रे ने समुदाय के लोगों को गुमराह करके रखा है. शासन से उपलब्ध जो सुविधाएं मिलती है, वो हम तक पहुंचने नहीं देती है.
आवास के लिए लिस्ट में आए नाम को करा दिया रद्द
उन्होंने कहा कि शासन की तरफ से कोरोना काल के समय में अलग-अलग संस्थाओं और कई अधिकारियों ने तृतीय लिंग समुदाय को सूखा राशन दिया, वो भी नहीं मिला. समुदाय से 14 लोगों के आवास के लिए लिस्ट में नाम आ गया था. जिसे कंचन सेंद्रे ने निगम के अधिकारियों को बोलकर रद्द करवा दिया है. उसे पद से जल्द हटाने मांग की है.
छत्तीसगढ़ सरकार का फैसला भी बड़ा अजीब सा रहा… सीनियर आईपीएस के ऊपर विराजित किये गए जूनियर प्रमोटी आईएएस :::
छत्तीसगढ़ सरकार के अपने नए नियम अन्य राज्यों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही भिन्न है।प्रदेश की वर्तमान सरकार अपने ही नए नियमावली बनाने की कोशिश में है।वैसे इस प्रदेश के किस्से तो बहुत है।आज हम दो दिन पूर्व प्रदेश सरकार के द्वारा निकाली गयी आईएएस अफसरों की जम्बो सूची की बात कर रहे है।वैसे भी प्रदेश की वर्तमान भूपेश सरकार कुछ करे या न करे पर तबादले का काम बहुत जल्दी व बडे पैमाने पर करती है।छत्तीसगढ़ में तबादला उद्योग चलाने की बात भी अकसर विपक्ष में बैठी भाजपा भी करती है।भूपेश सरकार ने आते ही नीचे से लेकर ऊपर तक के अफसरों के तबादले बड़ी तीव्रता के साथ किये है।इतनी बड़ी तीव्रता से तबादला करने में गलतियां भी होना लाजिमी ही है।प्रदेश में दो दिन पूर्व एक बड़ी लंबी सूची आईएएस अफसरों की निकली।इस सूची में कई जिलों के कलेक्टर के साथ ही मंत्रालय में बदलाव हुआ।इस तबादले की सूची आने से पहले ही मीडिया में लगभग सभी अफसरों की नवीन पदस्थापना की जानकारी आ ही गयी थी।कहि न कहि सरकार की गोपनीयता पर भी सवाल उठते है।
इस तबादले की सूची के विषय पर चर्चा करते है।प्रदेश की भूपेश सरकार ने दो दिन पूर्व आईएएस अफसरों के तबादलो की लंबी सूची निकाली, इस सूची में राजनांदगांव में कलेक्टर के पद पर पदस्थ रहे आईएएस टीपी वर्मा को परिवहन मंत्रालय के सचिव की बागडोर सौप दी साथ ही परिवहन आयुक्त बनाकर एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी।यह जिम्मेदारी इनको किस लिए मिली यह तो सभी जानते ही है।प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार से होने का फायदा आईएएस टीपी वर्मा को मिल ही गया।वैसे भी हर जगह परिवार के लोग सत्ता सुख का फायदा उठा ही लेते है।इसी कड़ी में आईएएस टीपी वर्मा भी अपने लाभ की व्यवस्था कर ही लिए।कांग्रेस की सत्ता प्रदेश में आते ही आईएएस टी पी वर्मा को दन्तेवाड़ा जैसे बड़े जिले में कलेक्टरी मिली उसके बाद राजनांदगांव जैसा जिला भी मिला।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्तेदार होने से टीपी वर्मा सीधे पहुँच गए परिवहन आयुक्त के पद पर।इस विभाग को वैसे मलाईदार विभाग भी कहा जाता है।छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य है जहाँ सरकार का अपना नियम अपनी शर्तों पर चल रहा है।देश के अन्य राज्यो में परिवहन आयुक्त की जिम्मेदारी सीनियर आईपीएस के कंधों पर होती है।वही छत्तीसगढ़ देश का ऐसा अकेला राज्य है जहाँ करीब 20 वर्षो से परिवहन आयुक्त के पद पर आईएएस अफसरों को बैठाला जा रहा है।आज भी यही ढर्राशाही अनवरत जारी है।परिवहन के काम को जितना अच्छा आईपीएस समझेगा उतना अच्छा शायद ही कोई आईएएस समझ पायेगा।
सीनियर आईपीएस के ऊपर जूनियर आईएएस को नियुक्त करने से सरकार के ऊपर कई सवाल उठते है।क्या प्रदेश की भूपेश सरकार के इस फैसले को उचित कहा जा सकता है।प्रदेश की सरकार को अपने इस फैसले पर मनन और चिंतन करने की आवश्यकता है।पुलिस महकमे के अंदर सरकार के इस फैसले पर सुगबुगाहट भी शुरू हो गयी है।अभी तक परिवहन आयुक्त के पद पर जितने भी आईएएस नियुक्त हुए,उनके साथ एडिशनल परिवहन आयुक्त के पद में आईपीएस को ही बैठाला गया पर उन दोनों में लगभग बैच की समानता लगभग होती ही थी।सीनियारिटी की बात को जरूर सोचा जाता था।पर इस सरकार ने नया अध्याय ही शुरू कर दिया।आज वर्तमान में एडिशनल परिवहन आयुक्त के पद पर सीनियर आईपीएस बैठे हुए है।वो भी बहुत जल्द शायद दो एक साल के अंदर एडीजी रैंक में पहुँच जाएंगे।इतने सीनियर आईपीएस के ऊपर एक जूनियर प्रमोटी आईएएस को परिवहन आयुक्त के पद पर नियुक्त करना समझ से परे है।भूपेश सरकार क्या ऐसा काम करके ही गड़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारे को चरितार्थ करेगी।
यह आदेश निकालकर वर्तमान भूपेश सरकार अपनी लचर कार्यप्रणाली को प्रदर्शित तो कर ही दी है।वैसे भी देश के इन दो प्रमुख पदों का विवाद बहुत पुराना है।दोनो अपने आपको एक बराबर आंकते ही है।आईएएस और आईपीएस में पावर को लेकर आपसी विवाद देश के कई राज्यों से अक्सर सुनाई भी देता है।सरकार के इस फैसले से इन दोनो में विवाद और बढ़ेगा। क्या प्रदेश की सरकार को इतने बड़े फैसले लेने से पहले इस मामले की जानकारी नही थी कि जिस विभाग में एडिशनल परिवहन आयुक्त के पद पर एक सीनियर आईपीएस नियुक्त है उसी विभाग में जूनियर आईएएस को उसका बॉस बनाकर नियुक्त करना सही नही होगा। इस प्रकार के फैसले से आईपीएस लॉबी भी नाराज हो सकती है? इस सरकार को तबादला करने की इतनी जल्दबाजी थी कि इस विषय पर ध्यान देना भी उचित नही समझी।
इस मामले से एक बात तो तय है कि प्रदेश की सरकार किस नियम से संचालित है।इसका आभास तो अब अफसरों को भी होने लगा।इस मामले में हमने प्रदेश के कुछ सीनियर आईपीएस अफसरो से बात भी की उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर सरकार के इस फैसले को गलत बताया।साथ ही यह भी कहा कि सीनियर आईपीएस अब अपने से 10 साल जूनियर प्रमोटी आईएएस को जवाब देने के लिए खड़े रहेगा।इस सरकार ने गजब ही कर दिया है।सरकार को अपना यह फैसला बदलना चाहिए।अगर परिवहन आयुक्त किसी आईएएस को बनाना ही था तो कम से कम सीनियर आईएएस को बनाती तो शायद यह बात आज नही उठती।ऐसे फैसलों से स्थिति सामान्य नही होती है।कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार का यह फैसला कही से भी न्यायोचित प्रतीत नही होता है।सरकार अपने इस फैसले को लेकर मनन व चिंतन करे।
जबलपुर : एनएसयूआई अध्यक्ष विजय रजक की थाना परिसर में गुंडागर्दी।
सिविल लाइन थाना परिसर में NSUI के अध्यक्ष ने सरेआम गुंडागर्दी की। अध्यक्ष ने अपने ही संगठन के पूर्व महासचिव को लात-घूसों से पीट डाला। पुलिस वालों ने बीचबचाव की कोशिश तो की, लेकिन सख्ती से रोकने का प्रयास नहीं किया। आरोपी अध्यक्ष पुलिस के सामने ही उसे पीटता रहा। वह पुलिस द्वारा किए जा रहे चालान का विरोध गांधीगीरी से करने थाने पहुंचा था। सिविल लाइंस पुलिस ने शिकायत पर NSUI अध्यक्ष समेत तीन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
NSUI छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष विजय रजक के साथ कभी कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाला पूर्व महासचिव शुक्ला नगर मदनमहल निवासी अंशुल सिंह ठाकुर को वर्तमान में संगठन से निष्कासित कर दिया गया है। सोमवार को अंशुल को पकड़ कर विजय रजक, देवेंद्र काछी और सिविल लाइंस निवासी शुभांशु कन्नौजिया सिविल लाइंस थाने पहुंचे।
सिविल लाइंस थाना परिसर में मारपीट करते हुए।
थाना परिसर में ही करने लगे मारपीट तीनों आरोपी अंशुल ठाकुर को सिविल लाइंस थाना परिसर में ही लात-घूंसों से मारने-पीटने लगे। एक पुलिस वाला दौड़ा तो विजय रजक ने उसे डांट कर रोक दिया। शोर-शराब सुनकर अंदर बैठे और स्टाफ पहुंच गए। अंशुल को तीनों आरोपियों के कब्जे से छुड़ाकर अंदर ले गए। बाजवूद अध्यक्ष की सीनाजोरी कि वह भी पुलिस वालों के पीछे-पीछे अंदर तक चला गया।
पुलिस वालों के सामने भी मारता रहा आरोपी विजय रजक।
अंदर भी पुलिस वालों से NSUI अध्यक्ष ने की बहस थाना परिसर में मारपीट करने वाला NSUI अध्यक्ष थाने के अंदर भी पुलिस वालों से बहस करता रहा। हालांकि सिविल लाइंस पुलिस ने पीड़ित अंशुल ठाकुर की शिकायत पर विजय रजक, देवेंद्र काछी और शुभांशु कन्नौजिया के खिलाफ मापीट, धमकी देने का प्रकरण दर्ज कर लिया है।
संगठन के नाम पर वसूली करने का लगाया आरोप पीड़ित अंशुल ठाकुर पर NSUI अध्यक्ष और आरोपी विजय रजक ने संगठन के नाम पर वसूली करने का आरोप लगाया। बताया कि 2019 में ही उसे संगठन से निष्कासित कर दिया गया है। बावजूद वह संगठन का नाम लेकर और धरना-प्रदर्शन व ज्ञापन की धमकी देकर अधिकारियों को ब्लैकमेल करता है। इसी तरह की ब्लैकमेलिंग की सूचना पर वे पहुंचे तो अंशुल मिल गया।
नीले शर्ट में NSUI अध्यक्ष विजय रजक अंशुल ठाकुर को मारते-पीटते हुए।
गांधीगीरी तरीके से गए थे चालान का विरोध करने पीड़ित अंशुल ठाकुर ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत में बताया कि दोपहर में भारतीय युवा कांग्रेस के शुभम बोहित की अगुवाई में वह कोरोना महामारी के दौरान महंगाई व आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों का पुलिस द्वारा बनाए जा रहे चालान वाली कार्रवाई का विरोध करने पहुंचा था। उसने गांधीगीरी तरीके से पुलिस को फूल भेंट कर चालानी कार्रवाई रोकने संबंधी ज्ञापन सौंप रहा था, तभी विजय रजक और उसके साथी पहुंच गए और जिला महासचिव के पद से पूर्व में निष्कासित किए जाने की बात पर मारपीट करने लगे।
कोरबा : राज्य शासन से प्राप्त वैक्सीन के अनुसार जिले में लोगों को कोविड का टीका लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 45 वर्ष से अधिक उम्र के दो लाख 66 हजार 516 लोगों को कोविड का टीका लगाया जा चुका है। 18 वर्ष से अधिक उम्र के 29 हजार 797 लोगों को कोविड वैक्सीनेशन किया जा चुका है। इस प्रकार जिले में कुल दो लाख 96 हजार 313 लोगों का कोरोना टीकाकरण पूर्ण हो चुका है। 45 वर्ष या अधिक उम्र के 17 हजार 878 लोगों का टीकाकरण बाकी है। विगत दिवस 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के दो हजार 213 लोगों को कोविड का टीका लगाया गया। अभी तक अंत्योदय श्रेणी के चार हजार 379, बीपीएल के 13 हजार 648, एपीएल श्रेणी के सात हजार 789 एवं फ्रंटलाइन वर्करों के अंतर्गत तीन हजार 981 लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है। कोरोना टीकाकरण अभियान के दौरान अभी तक कटघोरा और कोरबा के शहरी इलाकों में सबसे अधिक वैक्सीेनेशन हुआ है। इन इलाकों में अब तक 70 हजार 624 लोगों को कोरोना से बचाव के लिए टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण के मामलें में पोड़ी-उपरोड़ा विकासखण्ड पहले स्थान पर है जहां अब तक 43 हजार 650 लोगों को पहले डोज से वैक्सीनेट किया जा चुका है। दूसरे स्थान पर पाली विकासखण्ड है जहां 43 हजार 593 लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। कटघोरा विकासखण्ड में 39 हजार 611 लोगों को, कोरबा विकासखण्ड के ग्रामीण इलाकों में 34 हजार 649 लोगों को और करतला विकासखण्ड में 34 हजार 389 लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लगाया जा चुका है।
दूसरी डोज 38 हजार 476 लोगों को लगी – जिले में 45 वर्ष से अधिक उम्र के 38 हजार 476 लोगों को निर्धारित समयावधि पूरी होने पर कोविड-19 वेक्सीन की दूसरी डोज भी लगा दी गई है। कोरबा-कटघोरा के शहरी इलाकों में 17 हजार 444, कटघोरा विकासखंड के ग्रामीण इलाकों में सात हजार 817, पोड़ीउपरोड़ा विकासखंड में पांच हजार 179, करतला विकासखंड में तीन हजार 520, कोरबा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार 456 और पाली विकासखंड में 45 वर्ष से अधिक आयु के दो हजार 060 लोगों को वेक्सीन का दूसरा डोज दिया जा चुका है।
18-44 आयु वर्ग के 29 हजार से अधिक लोगों का टीकाकरण – कोरबा जिले में 18 से 44 आयु वर्ग के 29 हजार 797 लोगों को अब तक कोविड वेक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है। इस आयु वर्ग में सबसे अधिक कोरबा और कटघोरा के शहरी इलाकों में 10 हजार 512 लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है। दूसरे स्थान पर विकासखण्ड पाली है जहां पर चार हजार 411 लोगों को कोविड का वैक्सीन लगाया जा चुका है। इसी प्रकार कटघोरा के ग्रामीण क्षेत्रों में चार हजार 002 लोगों का, कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों में तीन हजार 580 लोगों का, करतला में तीन हजार 313 लोगों का एवं विकासखण्ड पोड़ी-उपरोड़ा में तीन हजार 979 लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है।
रायपुर। भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रतिनिधि मंडल ने आज प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के नेतृत्व में राज्यपाल अनुसुईया उइके को ज्ञापन सौंपा है. राज्यपाल को बताया कि 12वीं परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिका जमा करने स्कूलों में भीड़ लग रही है. इस भीड़ के चलते संक्रमण फैलने का खतरा है. राज्यपाल से भीड़ नियंत्रित करने समेत कई मांग की है. इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा.
भाजयुमो के प्रदेश मीडिया प्रभारी उमेश घोरमोड़े ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लगभग 3 लाख विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर 12वीं की परीक्षा के विषय में पुनर्विचार करने एवं उत्तर पुस्तिका जमा करने के नाम पर भीड़ एकत्रीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.
इस दौरान भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू, हेमंत सेवलानी, अमित मैशेरी, उमेश घोरमोड़े, विपिन साहू, गोविंदा गुप्ता मौजूद थे.
भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू ने कहा कि परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के मूल्यांकन का एक बड़ा माध्यम होता है, परंतु उत्तर पुस्तिका जमा करवाने के नाम पर भीड़ एकत्रित कर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ उचित नहीं हैं. जब सारे उत्तर सोशल मीडिया में उपलब्ध हैं तो मूल्यांकन का तो सवाल ही खत्म हो जाता है. अब सिर्फ संक्रमण का विषय बचता है, ऐसी स्थिति में जब यह छात्र आगामी 11 तारीख तक परीक्षा केंद्र में अपनी उत्तर पुस्तिका जमा करने जाएंगे, तो व्यवस्थाएं नियंत्रण से परे होंगीं, संक्रमण का खतरा होगा.
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू ने कहा कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता में रखते हुए सीबीएसई की परीक्षा रद्द कर दी गई हैं. अन्य कई राज्यों ने 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी हैं ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार को हठधर्मिता छोड़ इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मामले में अपने केंद्रीय नेतृत्व को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.
अमित साहू ने कहा कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने सभी राज्यों से छात्र हित में परीक्षा रद्द करने की मांग की है. उत्तरप्रदेश के साथ ही कांग्रेस शासित राजस्थान जैसे कई अन्य राज्यों में भी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं परंतु छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार उत्तर पुस्तिका एकत्रीकरण के नाम पर भीड़ एकत्रित कर रही हैं यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या हैं. छत्तीसगढ़ सरकार का निर्णय विद्यार्थी, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारीयों सभी के लिए संक्रमण का बड़ा कारण बन सकता हैं. प्रदेश सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए और तत्काल उत्तर पुस्तिका जमा करने के नाम पर भीड़ एकत्रित करने के निर्णय पर रोक लगानी चाहिए.
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैक्सीन फ्री करने की घोषणा के बाद बयानबाजी का दौर जोरों पर है. इसे लेकर बीजेपी मोदी का आभार जता रही है, तो कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर बता रही है. कांग्रेस की राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया था. पीएम मोदी ने राज्यों पर वैक्सीन का खरीदने का जिम्मा छोड़ दिया. छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है, जहां 18 प्लस आयु वर्ग के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन देने की घोषणा हुई
राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पैसे दिए उसके बाद भी छत्तीसगढ़ को भेजी जाने वाली वैक्सीन पहले केन्द्र की सरकार को भेजी गई. उसके बाद छत्तीसगढ़ को भेजी गई. जब पीएम मोदी पर सभी राजनीतिक दलों ने दबाव बनाया कि वैक्सीन मुफ्त मिलनी चाहिए. तब पीएम मोदी ने ये घोषणा की. लेकिन केवल घोषणा हुई है कब देंगे, कितनी मात्रा में देंगे, कौन सी वैक्सीन देंगे, कितने दिन में लगेगी. यह भी समझ से परे है. आमजनता के लिए वैक्सीन ही नहीं है, तो वो वाहवाही लूटने के लिए दूसरे देश को क्यों वैक्सीन भेज रहे हैं ? छत्तीसगढ़ की सरकार ने वैक्सीन के पैसे दिए है. अब क्या वो पैसे वापस होंगे या वैक्सीन भेजेंगे ? इस पर भी स्पष्ट नीति नहीं बनी.
भाजयुमो का राज्यपाल से मिलने का कोई औचित्य
भाजयुमो के ज्ञापन को लेकर राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 12वीं की परीक्षा हो गई है. लगभग सभी उत्तर पुष्टिकाएं जमा हो गई है. मुझे नहीं लगता कि यहां राज्यपाल से मिलने का कोई औचित्य है. दूसरे राज्यों में जहां एग्जाम नहीं हुए, वहां भाजयुमो को देखना चाहिए. बता दें कि भाजयुमो ने राज्यपाल से मुलाकात कर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर 12वीं की परीक्षा के विषय में पुनर्विचार करने और उत्तर पुस्तिका जमा करने के नाम पर भीड़ एकत्रीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. भाजयुमो ने पीडीएफ के माध्यम से उत्तर पुस्तिका जमा कराने निर्देश देने का निवेदन भी किया है.
केंद्र सरकार, राज्यों को देगी फ्री वैक्सीन
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि 21 जून से देश के हर राज्य में 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए भारत सरकार राज्यों को फ्री वैक्सीन मुहैया कराएगी. वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी.देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत, प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी. प्राइवेट अस्पताल वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे. इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा.
गाजियाबाद। मोरटी गांव में परिवार के साथ सो रही 17 वर्षीय नाबालिग साली पर तेजाब फेंकने वाले जीजा को नंद ग्राम थाने की पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर ली। साली को अपने प्रेमजाल फंसाने में नाकाम जीजा ने इस वारदात को अंजाम दिया।
नंदग्राम थाना प्रभारी नीरज कुमार सिंह ने बताया कि मोरटी गांव निवासी एक शख्स ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी उसके परिवार के साथ सो रही थी। किसी ने उसके ऊपर तेजाब फेंक दिया। इससे वह बुरी तरह झुलस गई थी। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने जब जांच पड़ताल की तो पता चला कि इस लड़की पर फेंकने वाला उसका सगा जीजा हरदोई निवासी राम लखन था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया और बताया कि उसकी पत्नी से उसका प्रेम विवाह हुआ था।
वह अपनी साली को भी अपने प्रेमजाल में फसाना चाहता था। उसके इनकार करने पर वह खफा हो गया और राम लखन ने अपनी साली पर तेजाब फेंक दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार अदालत के समक्ष पेश किया जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।