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हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर,जस्टिस प्रशांत मिश्रा होंगे चीफ जस्टिस।

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(खुलासा छत्तीसगढ़ )बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा बैठेंगे, जस्टिस मिश्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से सबसे वरीष्ठ जज थे। जस्टिस प्रशांत मिश्रा छत्तीसगढ़ के नए चीफ जस्टिस के पद पर राष्ट्रपति ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पी.रामकृष्णन नायर रामचंद्र मेनन सेवानिवृत होने वाले हैं। जस्टिस मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश बनाने का निर्देश केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने जारी कर दिया है,
बता दें कि पिछली बार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल समिति का सदस्य बनाया गया था,उस दौरान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हुआ था राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था।
जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने 2004 से 2007 तक छत्तीसगढ़ राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया, 1 सितम्बर 2007 से अपने उन्न्यन तक उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया,2009 को वे बिलासपुर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हुए।

शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गिरीश दुबे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जरूरतमंद लोगों को भोजन वितरित किया।

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(खुलासा छत्तीसगढ़) रायपुर । २३ मई शहर जिला काँग्रेस कमेटी ने आज सेवा अभियान के तीसरे दिन ज़रूरत मंद लोगों को भोजन वितरित किया।
शहर जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश दुबे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मेकाहरा में आए मरीज़ों के परिजनों को भोजन वितरित किया।
चंग़ोराभाँटा बाज़ार चौक में निगम सभापति प्रमोद दुबे ब्लांक अध्यक्ष प्रशांत ठेंगड़ी द्वारा एम्बुलेंस चालकों को आवश्यकता अनुसार भोजन उपलब्ध कराया।
ब्लांक अध्यक्ष अशोक ठाकुर एवं माधो साहू द्वारा टीकाकरण केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को जूस वितरित किया गया।पार्षद कामरान अंसारी ब्लांक अध्यक्ष दीपा बग्गा द्वारा कुष्ठ बस्तियों में भोजन वितरित किया गया।
ब्लांक अध्यक्ष सुमित दास अरुण जँघेल सुनील भुआल देवकुमार साहू दाऊलाल साहू सहदेव व्यवहार सचिन शर्मा नवीन चंद्राकर द्वारा जुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को भोजन कराया गया।
इस अवसर पर मुन्ना मिश्रा जी श्रीनिवास दिलशाद हुसैन पुष्पराज वैध शब्बिर खान महावीर देवाँगन कमलेश नथवानी कमल धृतलहरे उपास्थि थे।

बंशी कन्नौजे -प्रवक्ता
शहर जिला काँग्रेस कमेटी रायपुर

चीन की वैक्सीन को अनुमति दी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने

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एजेंसी 

जिनेवा: WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने शुक्रवार को वैश्विक टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए चीन की पहली वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब भारत में कोविड-19 का संक्रमण पूरी रफ्तार के साथ फैल रहा है. जिनेवा में WHO ने सिनोफार्मा की वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति दी है. यह पहली ऐसी वैक्सीन है जिसका उत्पादन गैर पश्चिमी देश कर रहा है, बता दें कि कोरोना के खिलाफ सिनोफार्मा की वैक्सीन खासी प्रभावी मानी गई है. डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेबियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने पूरे विश्व में एक बार फिर से बढ़ते कोरोना के मामलों और मौतों पर चिंता जताते हुए कहा कि हम भारत और ब्राजील में गंभीर परिस्थितियां देख रहे हैं. 

बताते चलें कि WHO ने इससे पहले फाइजर बायोटेक, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनका जैसी कंपनियों की वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति दे चुका है. जिसका उपयोग भारत और साउथ कोरिया के कई इलाकों में हो रहा है. लिस्ट में चीन की सिनोफार्मा की वैक्सीन का नाम जुड़ जाने से वैक्सीनेशन अभियान को गति मिल सकेगी.  

भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में 4,01,078 कोरोना संक्रमण के नए केस सामने आए हैं जबकि 4,187 लोगों की मौत हुई है. इसी के साथ देश में कुल संक्रमितों की संख्या 2 करोड़ 18 लाख 92 हजार 676 हो गई है और वहीं मृतकों की कुल संख्या 2 लाख 38 हजार 270 हो गई है. वहीं कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या में पिछले 24 घंटों में 78 हजार 282 नए मरीजों का इजाफा हुआ है, जिसके बाद एक्टिव मरीजों की संख्या 37 लाख 23 हजार 446 हो गई है. यह आंकड़े शुक्रवार सुबह 8 बजे से शनिवार सुबह 8 बजे तक के हैं.  

Covid का कहर अब बच्चो पर। 40 हजार से ज्यादा बच्चे पभावित

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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) ने कोहराम मचा रखा है. हर दिन कोरोना (Corona) के नए आंकड़े डरा रहे हैं. देश का कोई ऐसा राज्‍य नहीं बचा है, जहां कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम नहीं मचाया हो. पिछले कुछ दिनों में कोरोना के बढ़ते मामलों में कमी जरूर आई है लेकिन खतरा अभी भी कम नहीं हुआ है. कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात बड़ी संख्या में बच्चों का पॉजिटिव (Corona Positive) होना है. बच्‍चों में कोरोना के संक्रमण (Corona Infection) का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है क‍ि केवल कर्नाटक जैसे राज्य में ही पिछले दो महीने में 9 साल से कम उम्र के 40 हजार से ज्यादा बच्चे कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार की नींद उड़ा दी है. कोरोना के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो कर्नाटक में 0-9 साल की उम्र के 39,846 और 10-19 उम्र के 1,05,044 बच्चे कोविड पॉजिटिव पाए जा चुके हैं. कोरोना का ये आंकड़ा इस साल 18 मार्च से 18 मई तक का है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जब से कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी, तब से लेकर इस साल 18 मार्च तक 17,841 और 65,551 बच्चे कोविड से संक्रमित हुए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार की तुलना में दूसरी लहर बच्‍चों के लिए ज्‍यादा खतरनाक साबित हुई है. पिछली बार की तुलना में दूसरी लहर में तकरीबन दोगुने की रफ्तार से बच्चों को कोरोना संक्रमण हुआ है.

लेडी कर्जन अस्पताल के डॉक्टर डॉ. श्रीनिवास का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक तरीके से आगे बढ़ रही है. इस बार अगर कोई शख्‍स कोरोना से संक्रमित हो रहा है तो उसके दो दिन के भीतर ही घर के बाकी सदस्‍य भी कोरोना से संक्रमित हो जा रहे हैं. ऐसे में कुछ केसों में बच्‍चें भी कोरोना की चपेट में आ जा रहे हैं. डॉ. श्रीनिवास ने कहा अगर घर में कोई सदस्‍य कोरोना से संक्रमित होता है तो सबसे पहले बच्‍चे उनके संपर्क में आते हैं. ऐसे में जरूरी है कि कोरोना के लक्षण दिखते ही बच्‍चों से दूरी बनाएं और उनके संपर्क में आने से बचें.

बच्‍चों की सेहत पर नजर रखने वाली डॉक्‍टर सुपराजा चंद्रशेखर ने कहा कि हमने देखा है कि कोरोना का संक्रमण बच्‍चों में उतना असर नहीं करता कि उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़े. दस में से सिर्फ एक ही बच्चे को अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत पड़ती है, बाकी के बच्चे आसानी से घर पर ही आइसोलेट होकर ठीक हो जाते हैं. हालांकि इस दौरान घर पर उनकी ठीक और सख्‍ती से देखभाल करने की जरूरत होती है. उन्होंने कहा, जैसे ही बच्चों में कोरोना के लक्षण दिखाई दें, तुरंत ही उनका कोविड टेस्ट करवाना चाहिए.

ताउते टला नहीं की यास ने दे दी दस्तक।

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ताउते साइक्‍लोन के बाद अब देश के पूर्वी तटीय क्षेत्रों में चक्रवाती तूफान यास दस्तक दे सकता है. इससे निपटने के लिए एनडीआरएफ ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दलों की तैनाती शुरू कर दी है. मौसम विभाग के अनुसार, अंडमान और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जो 22 मई से हरकत में आएगा और इसके बाद 72 घंटों में इसके चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की आशंका है.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवाती तूफान की शक्ल में ‘यास’ 26 मई की शाम बंगाल और ओडिशा में तबाही मचा सकता है. इस दौरान दोनों राज्यों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं, असम, मेघालय, बिहार आदि राज्यों में भी इसका असर हो सकता है. इन राज्यों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है. ताउते तूफान की तबाही देखते हुए यास तूफान को लेकर अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.

क्यों आते हैं साइक्लोन?
ये साइक्लोन यानी चक्रवाती तूफान जिन क्षेत्रों में आते हैं, वहां तबाही मचाते हैं और फिर चले जाते हैं. ये तूफान क्यों आते हैं, इस बारे में मौसम विज्ञानी बताते हैं कि जब गर्म क्षेत्रों के समुद्र में हवा गर्म होकर अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बना देती है, तो संघनन से बादलों का निर्माण करती हैं और फिर रिक्त स्थान को भरने के लिए नम हवाएं तेजी के साथ नीचे जाकर ऊपर आती हैं. ऐसे में तेज हवाओं के साथ मूसलधार बारिश होती है.

साइक्लोन से जान-माल को काफी नुकसान पहुंचता है. इससे पहले अम्फान, फानी जैसे चक्रवातों ने भी खूब नुकसान पहुंचाया है. उससे भी पहले कटरीना, निवार, निसर्ग, हुदहुद, बुलबुल, ​हिकाका, लैरी, ​लीजा, कटरीना वगैरह… फिर ताउते और अब यास साइक्लोन…. क्या आपने कभी ये सोचा है कि इन चक्रवाती तूफानों को नाम कैसे दिए जाते हैं? आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से…

कब हुई चक्रवातों के नामकरण की शुरुआत?
चक्रवातों के नामकरण की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में हुई एक संधि से हुई, वहीं, हिंद महासागर क्षेत्र की बात करें तो यहां यह व्यवस्था वर्ष 2004 में शुरू हुई. भारत की पहल पर इस क्षेत्र के 8 देशों ने तूफानों का नामकरण शुरू किया. भारत के अलावा इनमें पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, ओमान और थाईलैंड शामिल थे. फिर वर्ष 2018 में इसमें ईरान, यूएई, कतर ओर यमन आदि देश भी जुड़े.

13 सदस्य देश तय करते हैं तूफानों के नाम
तूफानों के नामकरण की प्रक्रिया दिलचस्प है. हिंद महासागर क्षेत्र में यदि तूफान आने की आशंका बनती है तो भारत समेत 13 सदस्य देशों क्रमानुसार अपनी तरफ से 13 नाम देते हैं. ये नाम इसलिए दिए जाते हैं, ताकि पहले से ही वैज्ञानिक और आम लोग इन तूफानों के बारे में स्पष्ट रह सकें. लोगों के मन में यह नाम स्थापित हो जाए, ताकि इसकी चर्चा होते ही वे समझ जाएं.

प्रदेश में ब्लैक फंगस से मौत, कोरोना की हरा चुकी दो महिलाओं ने म्यूकरमाइकोसिस से दम तोड़ा, आज इसे महामारी घोषित कर सकती है सरकार

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छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस के संक्रमण से मौत का सिलसिला शुरू हो चुका है। शुक्रवार को रायपुर में इलाज करा रही दो महिलाओं ने दम तोड़ दिया। दोनों को कोरोना को हराने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आ गई थीं। इधर सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आज इसे महामारियों की सूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी हो सकती है।

रायपुर एम्स में इलाज करा रही एक 70 वर्षीय महिला की शुक्रवार को मौत हो गई। वे ब्लैक फंगस के संक्रमण से पीड़ित थीं। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले सर्जरी करके उनकी आंख और मस्तिष्क के फंगस प्रभावित टिश्यू निकाले गए थे। उनका इलाज जारी था, लेकिन जटिलताओं की वजह से उनको बचाया नहीं जा सका। भिलाई की एक महिला ने रायपुर के ही एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया है।

करीब 56 साल की इस महिला को कोरोना के बाद सांस संबंधी दिक्कतों की वजह से रायपुर में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद वे ठीक हो रही थीं, तभी उनमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिखे। इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। प्रदेश में अब तक पांच से छह मरीज ब्लैक फंगस की वजह से मर चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया, “महामारी की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसपर विधि विभाग का अभिमत मांगा गया था। वह मिलते ही अधिसूचना जारी हो जाएगी।” सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि “यह महामारी कोरोना जैसी महामारी नहीं है। यह इंसान से इंसान में नहीं फैलती।”

प्रदेश में अभी ब्लैक फंगस के 102 मरीज
छत्तीसगढ़ में शुक्रवार शाम तक की स्थिति में ब्लैक फंगस के 102 मरीजों का इलाज जारी था। इनमें से 78 मरीज तो रायपुर एम्स में ही भर्ती हैं। रायपुर और दुर्ग जिले को सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। दुर्ग जिले में 23 मरीजों की पहचान हुई है। प्रदेश में ब्लैक फंगस से मौत का पहला मामला भी दुर्ग के भिलाई में ही आया था। मृतकों में दुर्ग, महासमुंद और कोरिया जिलों के मरीज बताए जा रहे हैं।

रायपुर CMHO ने बनाई सर्विलेंस सेल
इधर रायपुर CMHO स्तर पर एक जिला स्तरीय सर्विलेंस सेल बनाई गई है। इसमें 12 डॉक्टरों को शामिल किया गया है। शुक्रवार को इन डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया। इस सेल ने जिले के 1600 ऐसे लोगों की सूची बनाई है, जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान लंबे समय तक ICU में रहना पड़ा था। सेल के डॉक्टर एक तय प्रश्नावली के हिसाब से इन लोगों को फोन कर फीडबैक लेंगे। अगर उनमें से किसी मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण की संभावना दिखे तो उन्हें अस्पताल बुलाकर जांच करने की व्यवस्था करनी है। इस सूची में आगे भी लोग जुड़ते रहेंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ चर्चा में भी हुई बात
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की वीडियो चर्चा के दौरान भी ब्लैक फंगस का मामला उठा। डॉ. हर्षवर्धन ने बीमारी का अपडेट लेने के बाद राज्यों से कहा, इसके इलाज के लिए सभी तैयारियां कर ली जाएं। आवश्यक दवाएं भी तैयार रखी जाए। दैनिक भास्कर से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया, केंद्र सरकार से ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल हो रहे इंजेक्शन के 12 हजार वॉयल तुरंत मांगे हैं। उनसे कहा गया है कि दवा बाजार में भी नहीं मिल रही है। ऐसे में केंद्र सरकार इसे उपलब्ध कराने में मदद करे।

क्या है यह ब्लैक फंगस जो ले रहा है जान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ब्लैक फंगस (म्युकर माइकोसिस) एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जो दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित है और दवाईयां ले रहे हैं। इससे उनकी प्रतिरोधात्मक क्षमता प्रभावित होती है। यदि यह फंगस शरीर के अन्दर चला जाता है तो उसके साइनस या फेफड़े प्रभावित होंगे। इसकी वजह से गम्भीर बीमारी हो सकती है। यदि इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया गया तो यह घातक हो सकती है।

यह लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को बताएं
आंख, नाक में दर्द और आंख के चारों ओर लालिमा, नाक का बंद होना, नाक से काला या लाल तरल द्रव्य निकलना, जबड़े की हड्डी में दर्द होना, चेहरे में एक तरफ सूजन होना, नाक अथवा तालु काले रंग का होना, दांत में दर्द, दांतों का ढीला होना, धुंधला दिखाई देना, शरीर में दर्द होना, त्वचा में चकत्ते आना, छाती में दर्द, बुखार आना, सांस की तकलीफ होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति में परिवर्तन आना।

ऐसे कर सकते हैं बचाव
ब्लैक फंगस संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टरों ने कुछ उपाय बताए हैं। उसके मुताबिक धूल भरे स्थानों में मास्क पहनकर, शरीर को पूरे वस्त्रों से ढंक कर, बागवानी करते समय हाथों में दस्ताने पहन कर और व्यक्तिगत साफ-सफाई रख कर इससे बचा जा सकता है।

ब्लैक फंगस के बाद अब ने मुसीबत वाइट फंगस।ब्लैक फंगस से ज्यादा घातक वाइट फंगस।

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नई दिल्ली. भारत (India) में कोरोना वायरस (Coronaviurus) के बाद म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) यानि ब्लैक फंगस और अब व्हाइट फंगस ने चिंता बढ़ा दी है. बिहार की राजधानी पटना में इस नए फंगल इंफेक्शन के कुछ मामले सामने आए हैं. पंजाब, राजस्थान समेत कई राज्यों ने पहले ही ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है. ऐसे में व्हाइट फंगस के नए मामलों ने सरकारी और मेडिकल स्तर पर चिंताओं में इजाफा किया है. आइए इसके बारे में कुछ अहम बातों को जानते हैं-

व्हाइट फंगस के बारे में पता कैसे चला?
जी न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट में पीएमसीएच में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर एसएन सिंह के हवाले से बताया गया है कि चारों मरीजों में कोविड-19 के लक्षण नजर आ रहे थे, लेकिन उनकी हर जांच नेगेटिव आ रही थी. डॉक्टर ने बताया कि मरीजों की गहन जांच करने पर पता चला कि वे व्हाइट फंगस का शिकार हो गए हैं. हालांकि, सभी मरीज फिलहाल एकदम स्वस्थ हैं और उन्हें एंटी-फंगल दवाएं दी गई हैं.

क्या व्हाइट फंगस ब्लैक फंगस से ज्यादा घातक है?
स्वास्थ्य के जानकारों के अनुसार, ब्लैक फंगस की तुलना में व्हाइट फंगस ज्यादा घातक है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा इसलिए क्योंकि यह केवल फेफड़े ही नहीं, बल्कि नाखून, त्वचा, पेट, किडनी, दिमाग, निजी अंग और मुंह को भी प्रभावित करता है.

व्हाइट फंगस के लक्षण क्या हैं और कौन इस संक्रमण के ज्यादा जोखिम में है?
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर्स बताते हैं कि इस दुर्लभ फंगल बीमारी के लक्षण कोरोना वायरस संक्रमण की तरह ही हैं. चूंकी, यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है, तो इस बीमारी का पता HRCT टेस्ट कर भी लगाया जा सकता है. कम इम्युनिटी वाले लोगों को इस फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा है. इसके अलावा डायबिटीज जैसी बीमारियों या लंबे समय से स्टेरॉयड ले रही मरीजों को व्हाइट फंगस का शिकार होने की संभावना ज्यादा है.

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस को महामारी बीमारी अधिनियम 1897 के तहत अधिसूच्य बीमारी बनाने की अपील की थी. फिलहाल, तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान, असम और ओडिशा ने इस अधिनयम के तहत ब्लैक फंगस को अधिसूचित किया है. भाषा के अनुसार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस को महामारी घोषित किया जाएगा. उन्होंने अस्पतालों से आग्रह किया कि वे कोविड-19 के उपचार में स्टेरॉइड दवाओं का नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल करें.

रायपुर में 91 के पार हुआ पेट्रोल

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रायपुर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं। लगभग 20 दिन पहले 89 रुपए प्रति लीटर में मिल रहा सामान्य पेट्रोल अब 91 रुपए प्रति लीटर में बिक रहा है। रायपुर के टिकरापारा स्थित हरचंद पेट्रोल पंप के संचालक ने बताया कि एक दिन की आड़ में लगभग 20 से 30 पैसे प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़ रही है। इस वक्त रायपुर में एक्सट्रा प्रीमीयम पेट्रोल 94 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है।

हर दिन नई कीमतें होती हैं जारी
हर दिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। हालांकि कई बार कोई बदलाव नहीं होता। मगर इंडियन ऑयल इसी वक्त नई कीमतों का अपडेट जारी करता है। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम तय होता है। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।

कंपनियां बढ़ा रही MRP
किराना सामान और सब्जियों के दामों पर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें असर डाल रही हैं। रायपुर के किराना व्यवसायी और चेंबर ऑफ कॉमर्स के जितेंद्र बरलोटा ने बताया कि चीजों के दाम आए दिन बढ़ रहे हैं। बड़ी कंपनियां चुपके से MRP में बदलाव कर रही हैं। कुछ ब्रांड के बाथ सोप में 5 रुपए तक दाम बढ़ गए हैं। बर्तन धोने के साबुन पर भी अब दो रुपए बढ़कर MRP प्रिंट आ रही है। खाने के तेल की कीमतों पर भी लॉकडाउन और पेट्रोल-डीजल के दामों का असर पड़ा है। 1800 रुपए में बिकने वाला सन फ्लावर तेल का टीपा अब 2600 रुपए में बिक रहा है। चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमर परवानी ने बताया कि बहुत सी चीजों के दामों पर फौरन असर नहीं पड़ता मगर दाम तो बढ़ते ही हैं।

GST के दायरे में लाने की मांग
चैंबर ऑफ कॉर्मस के अध्यक्ष अमर परवानी ने कहा कि हम पेट्रोलियम मंत्रालय से लगातार इस बात की मांग कर रहे हैं कि पेट्रोल को GST के दायरे में लाया जाए। इससे कीमत कम होगी। आम ग्राहकों पर पेट्रोल की कीमतों की वजह से बढ़ने वाली महंगाई का असर भी कम पड़ेगा। इस पर हाल ही में एसबीआई इकोनोमिस्ट ने एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह बात कही कि दिल्ली में पेट्रोल को अगर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है तो इसका रीटेल भाव इस समय भी कम होकर 75 रुपये प्रति लीटर तक आ सकता है। इस पर केंद्र सरकार जीएसटी काउंसिल की बात-चीत जारी है

टूलकिट मामले में भाजपाई कर रहे प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन।थाना सिविल लाइन के परिसर में भी किया धरना

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में टूलकिट मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, श्रीचंद सुंदरानी, आरडीए के पूर्व अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव सहित अन्य नेता गिरफ्तारी देने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने में धरने पर बैठे हैं।

गौरतलब हो कि जिला और ब्लॉक कांग्रेस इकाइयों द्वारा दो दिन पहले प्रदेश के अलग-अलग थानों में भाजपा नेताओं के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है. इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह समेत अन्य नेताओं का नाम शामिल किया गया है. वही भाजपा नेताओं ने एफ आईआर दर्ज किए जाने के विरोध में अपने-अपने घरों में धरना-प्रदर्शन किया था।

प्रदेशभर में टूलकिट मामले को लेकर जिला मुख्यालयों में भाजपा के जिला अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन कर गिरफ्तारी की मांग की गई। बिलासपुर में नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिविल लाईन थाना बिलासपुर में पहुंचकर धरना प्रदर्शनकर गिरफ्तारी की मांग की।

वहीं दुर्ग में पूर्व सीएम रमन सिंह के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ के बीजेपी नेता इस मुद्दे पर आरपार की लड़ाई में जुट गए हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय धरने पर बैठी हैं।

दुर्ग के सिटी कोतवाली के सामने सरोज पांडेय का धरना जारी है। उनके साथ धरने में भाजपा नेता लाभचंद बाफ ना, जिला अध्यक्ष शिवकुमार तमेर भी शामिल है। धरना प्रदर्शन कोरोना गाइडलाईन के अनुसार किया जा रहा है।

सिविल लाईन थाना रायपुर में धरने पर बैठे बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, श्रीचंद सुंदरान एवं संजय श्रीवास्तव के अतिरिक्त अन्य कोई कार्यकर्ता थाना परिसर में मौजूद नहीं है। अन्य कार्यकर्ता थाने के बाहर सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए दूर-दूर खड़े रहकर मामले का विरोध दर्ज कराते दिखे।

महासमुंद में भाजपा नेताओं का जेल भरो आंदोलन जारी है। राम विचार नेताम समेत अन्य नेता कोतवाली थाना पहुंचे हैं। भाजपा नेता अपनी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में मिला पहला वाइट फंगस एक्टिव केस। 516 ब्लैक फंगस के मरीजों का चल रहा है उपचार ।

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मध्यप्रदेश के जबलपुर में पहले वाइट फंगस के केस की पुष्टि हो गई है 55 वर्षीय महिला की 17 मई को ऑपरेशन किया गया था 21 मई को जिसकी रिपोर्ट आ गई है जिसमें वाइट फंगस का इन्फेक्शन पाया गया है

वहीं इधर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की हालत पहले ही ठीक नहीं है गांधी मेडिकल कॉलेज में लोगों मरीजों के परिजनों ने भीड़ लगा कर रखी हुई है भोपाल में ब्लैक फंगस के 250 से भी ज्यादा मामले हैं और प्रदेश में 3 दिनों से ब्लैक फंगस के इलाज में उपयोग होने वाली इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया है।

अभी प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों में 516 से भी अधिक ब्लैक फंगस के एक्टिव केस हैं जिनका इलाज चल रहा है पर उपयोग में लाए जाने वाली जरूरी इंजेक्शन की कमी है और मंत्री प्रभु राम चौधरी जी का बनाया है कि जल्दी कमी को दूर कर के आपूर्ति को सम्मान कर दिया जाएगा।