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वरमाला डालने से पहले दुल्हन ने पूछा एक सवाल, नहीं बता पाया दूल्हा… लौटा दी बारात…

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शादियां टूटने की कई वजहें सामने आती रहती हैं. कभी ऐसा होता है कि दहेज की बात नहीं बन पाई तो कभी किसी और घटना के चलते शादी टूट गई. लेकिन उत्तर प्रदेश से शादी टूटने की घटना तब सामने आई जब दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर थे और दुल्हन ने एक सवाल पूछ लिया.

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का है, यहां खरेला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने पुत्री की शादी पनवाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव में तय की थी. 30 अप्रैल की रात बारात लड़की पक्ष के दरवाजे पहुंची, इस दौरान बारातियों की खूब खातिरदारी हुई.

इसी बीच जयमाल कार्यक्रम के दौरान दूल्हा अजीब हरकतें करने लगा, ये सब दुल्हन देख रही थी. दुल्हन ने जयमाला डालने से पहले दूल्हे से एक सवाल कर डाला. उसने कहा कि अगर वो इस सवाल का जवाब देगा तभी वो शादी करेगी. अगर जवाब नहीं दे पाया तो शादी नहीं करेगी.

दरअसल, दुल्हन ने दूल्हे से दो का पहाड़ा सुनाने को कहा. दूल्हन के सवाल के बाद दूल्हे को तो पहले कुछ समझ नहीं आया. इसके बाद वह इधर-उधर देखने लगा और उसकी पोल खुल गई. फिर दुल्हन ने दूल्हे के साथ सात फेरे लेने से इनकार कर दिया और वरमाला नहीं पहनाया.

दुल्हन ने साफ मना कर दिया कि वह इससे शादी नहीं करेगी. इतना सुनते ही बारातियों के पांव से जमीन खिसक गई. खुशी का माहौल पूरा तनाव में बदल गया. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या निर्णय लिया जाए. दुल्हन ने कहा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति से शादी नहीं कर सकती, जिसे गणित की मूल बातें भी पता नहीं हैं.

घंटों चर्चा के बाद भी मामला नहीं सुलझ सका और पूरी रात दुल्हन को मनाने का प्रयास जारी रहा, लेकिन उसने नहीं सुनी. जब पुलिस को इसके बारे में पता चला तो समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन लड़की ने बात नहीं मानी. आखिरकार लड़की की बात मान ली गई.

लड़की पक्ष के लोग थाना पहुंच गए और मांग की कि शादी में जो रुपये खर्च हुए हैं, उसे वापस दिलाया जाए. थानाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनी गई. उन्होंने बताया कि यह एक अरेंज मैरिज थी.

थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों के लोगों ने बातचीत की और समझौता किया गया. बातचीत में तय हुआ कि दोनों पक्ष के लोग एक-दूसरे को दिए गए उपहार और गहने वापस करेंगे. उनकी आपसी सहमति को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है.

बताया जा रहा है कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि लड़की से झूठ बोला गया कि लड़का पढ़ा लिखा है. बारात के आने के बाद सारी रस्में भी शुरू हो गई थीं. लेकिन लड़की को कहीं से भनक लगी कि लड़का उतना पढ़ा लिखा नहीं है, जितना बताया गया है.

इसके बाद लड़की ने ठान लिया कि वह खुद इस बात की जानकारी लेगी. ठीक वरमाला से पहले लड़की ने लड़के से सवाल दाग दिया और वह बता भी नहीं पाया. लड़की का शक सही निकला, उसने तुरंत शादी करने से मना कर दिया.

जब जयमाल कार्यक्रम से ठीक पहले भागा था दूल्हा: एक ऐसा ही दिलचस्प मामला पिछले दिनों कर्नाटक के चिकमंगलुरू जिले से सामने आया था दूल्हा होने वाली पत्नी को मंडप में छोड़ प्रेमिका के साथ भाग गया. दुल्‍हन ने भी निर्णय लेने में देरी नहीं की और शादी में आए एक बाराती के साथ ही शादी कर डाली.

इस मामले में बताया गया था कि लड़के का चक्कर किसी और से चल रहा था, लेकिन लड़का घर वालों के कहने पर शादी करने वाला था. तभी उसकी प्रेमिका ने कहा कि अगर वह यह शादी करेगा तो वह जहर खा लेगी. यह सुनते ही लड़का शादी के मंडप से ही भाग गया था.

उधर लड़का शादी के मंडप से भागा इधर लड़की वालों के होश उड़ गए. लेकिन लड़की ने ऐसा निर्णय लिया कि सब दंग रह गए. लड़की ने उन्हीं बारातियों में से अपना जीवन साथी चुन लिया.

बता दें कि शादी के ऐसे ऐसे रोचक मामले आते रहते हैं. कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के ही अलीगढ़ से एक दिलचस्प मामला सामने आया था जब एक लड़की अपनी शादी से ठीक पहले जिलाधिकारी के पास पहुंच गई. युवती ने डीएम को बताया कि गांव की सड़क काफी खराब है, बारात आने में काफी दिक्कत होगी.

डीएम ने तत्काल लड़की की शिकायत सुनकर संबंधित अधिकारी को शादी से पहले सड़क बनाने के निर्देश दिए. डीएम ने अधिकारियों से कहा कि जैसे ही सड़क का काम पूरा हो जाए उन्हें तुरंत ही इसकी सूचना दी जाए. डीएम की यह बात सुनकर युवती खुशी-खुशी अपने घर चली गई.

इस मामले में बताया गया कि जिस गांव में रहती थी वहां सड़कों की हालत बेहद खराब है. जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे हैं, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. रात के समय दुर्घटना होने की संभावना भी बढ़ जाती है. ऐसे में लड़की ने गुहार लगाई.

कोरोना के नाम पर मुख्यमंत्री से मिलकर अकेले में क्या चर्चा करना चाहते हैं भाजपाई?-आर.पी. सिंह

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कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आर पी सिंह ने आज एक बयान जारी करते हुए यह जानना चाहा है कि एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी के नेता दिखावटी तौर पर कोरोना संक्रमण को लेकर परेशान होने का तमाशा करते हैं और मुख्यमंत्री जी से मिलकर इस विषय पर चर्चा भी करना चाहते हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री जी की सहमति जताने और वर्चुअल बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने के प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं।

काग्रेस प्रवक्ता आर पी सिंह ने जानना चाहा है कि ऐसी कौन सी  गोपनीय बातें हैं जो भाजपा के चुनिंदा नेता जिसमें 15 वर्षों के मुख्यमंत्री रमन सिंह और दूसरे वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हैं मुख्यमंत्री से मिलकर अकेले में ही करना चाहते हैं। भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष धर्म लाल कौशिक को खुलकर यह बात सार्वजनिक करना चाहिए कि वह मुख्यमंत्री से मिलकर कौन सी गोपनीय बात करना चाहते हैं ? ताकि प्रदेश की जनता भी जान सके कि सच क्या है? भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में अगर कोरोनावायरस को लेकर थोड़ी भी चिंता होती तो वर्चुअल बैठक करने में क्या परेशानी थी? जब देश के प्रधानमंत्री सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक नहीं अनेकों बार वर्चुअल बैठक करते हों तो फिर राज्य के भाजपा नेताओं को इससे तकलीफ कैसी? कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा के अंदर खाने में उपजी गुटबाजी ही इस बैठक से पीछे हटने की मूल वजह रही हो? क्या यह सच नहीं है कि प्रतिनिधि मंडल में भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता और 15 वर्षों के मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह का नाम ही शामिल नहीं है? यह भी तो हो सकता है की आज जब पूरी दुनिया और देश में कोरोना से निपटने की मोदी सरकार की असफलता की चर्चा जोरों पर है भाजपा का यह सोचा समझा राजनीतिक कदम मोदी सरकार की विफलता से ध्यान हटाने का कोई प्रयास रहा हो? खैर जो भी हो भाजपा नेताओं को सच खुल कर प्रदेश की जनता को बताना चाहिए। अगर रचनात्मक सुझाव है तो वर्चुअल बैठक में भी दिए जा सकते हैं एक्चुअल बैठक की ही ज़िद क्यों? क्या कहीं यह डर तो नहीं सता रहा है कि वर्चुअल बैठक रिकार्डेड तथ्य होती हैं जिससे भविष्य में कभी भी मुकरा या किनारा नहीं किया जा सकता? सच क्या है विष्णु देव साय, धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर, बृजमोहन अग्रवाल और सुनील सोनी जी को राज्य की जनता को बताना चाहिए।

₹98 करोड़ का नुकसान,20 हजार हुए बेरोजगार 2800 से जादा बसे नहीं चल रहीं

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जिलों व कई राज्यों के बीच बस सेवा ठप, संचालक बोले- ऐसा ही रहा तो किस्त चुकाने बेचनी होगी जायदाद

जीवन की गति के साथ कोरोना ने राज्यभर में बसों के पहिये भी रोक दिए हैं। पिछले साल मार्च से राज्य के अंदर बसों का संचालन ठप है। बीच में कुछ रूट पर शुरू हुआ तो कुछ ही महीनों में फिर थम गया। हालत ऐसी है कि कोरोनाकाल में बस नहीं चलती है तो हर महीने करीब 100 करोड़ के नुकसान और रोजी-रोटी का संकट है। बस चलाई जाती है तो संक्रमण फैलने का डर है।

13 जिलों का हाल… जिलों व कई राज्यों के बीच बस सेवा ठप, संचालक बोले- ऐसा ही रहा तो किस्त चुकाने बेचनी होगी जायदाद

अंबिकापुर; हर महीने 5 करोड़ का कारोबार ठप, 350 बसें थमीं
सरगुजा जिले में 350 बसें खड़ी हैं। इससे लोगों को जहा आने जाने में परेशानी हो रही है। वहीं 5 करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। इसमें करीब 2 करोड़ शासन को मिलने वाली रायल्टी भी है। बसों के नहीं चलने से ड्राइवर,कंडक्टर, खलासी सहित करीब 5 हजार लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।

कोरिया; 200 एजेंट्स के रोजी रोटी पर संकट, 50 बसें थमीं
जिले में करीब 50 बसें खड़ी हैं। करीब 60 ड्राइवर, 50 कंडक्टर, 50 खलासी समेत 200 से अधिक एजेंट्स के रोजी रोटी पर संकट आ गया है। बस बंद होने से नई बसें चलाने वाले संचालको के सामने किस्त, फिटनेस, इंश्योरेंस का भुगतान करना मुश्किल भरा बना हुआ है। 2 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित है।

कोरबा; माह में 2 कराेड़ का व्यवसाय प्रभावित, 130 बसें थमीं
जिले के अन्य क्षेत्राें के अलावा दूसरे जिलाें के लिए 130 बसें चलती है। लाॅकडाउन में सभी 130 बसें खड़ी है। जिससे प्रति माह 2 कराेड़ रुपए का व्यवसाय प्रभावित हाे रहा है। ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी और कुली समेत 4 साै लाेगाें के सामने परिवार चलाना मुश्किल हाे रहा है।

रायगढ़; 3 करोड़ का परिवहन कारोबार ठप, 400 बसें थमीं
लॉकडाउन होने की वजह से लोग कहीं भी आना-जाना नहीं कर रहे हैं, इसकी वजह से बसे खड़ी हुई हैं। अभी सीधे तौर पर 12 सौ लोग जो बस परिवहन से जुड़े हुए हैं। सारंगढ़ में ही ओडिशा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग जैसे रूट में 150 गाड़ियां चलती हैं।

जशपुर; बस से जुड़े 1000 कर्मी बेरोजगार 150 बसें थमीं
जिले में यात्रियों को आने-जाने के लिए केवल बस परिवहन ही एकमात्र सहारा है। जिले से विभिन्न मार्गों में चलने वाली 150 बसें चलती है।जिनसे 1000 हजार लोगो को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। बसों के संचालन रुकने से उनकी रोजी – रोटी पर बुरा प्रभाव पड़ा है। बस व्यवसाय से जुड़े लोगो का कहना है कि, पहियों के थमने से बस मालिक, ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी, पार्ट्स व्यवसायी, बुकिंग एजेंट भुखमरी की हालत में आ गए हैं।

जांजगीर; 2 करोड़ से अधिक का नुकसान, 268 बसें थमीं
13 अप्रैल से लॉकडाउन के बाद से बसों के पहिए थम गए हैं। बस ऑपरेटर संघ के जिला अध्यक्ष मन्ना सिंह ने बताया जिले में 24 से ज्यादा बस मालिकों के पास करीब 268 बसें है। सभी बसें 13 अप्रैल के बाद से खड़ी हुई है। बस परिवहन सेवा बंद होने से प्रतिदिन साढ़े सात लाख रुपए का नुकसान बस ऑपरेटरों को हो रहा है। बीते 25 दिनों में करीब दो करोड़ का नुकसान बस संचालकों को हुआ है।

कवर्धा; एक हजार से अधिक लोग बेरोजगार, 300 बसें थमीं
जिले में चलने वाली यात्री बस बंद हैं। बस संचालन से जुड़े लगभग एक हजार कर्मचारी अब बेरोजगार हो गए है। बस मालिक संघ के जिला अध्यक्ष करन बंजारे ने बताया कि कोरोना के कारण कबीरधाम जिले से कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, मुंगेली, बेमेतरा समेत जिले के भीतर चलने वाली सभी बस 11 अप्रैल से बंद है। लॉकडाउन से पहले जिले से करीब 300 से अधिक बस चला करती थी।

राजनांदगांव; 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित, 350 बसें थमीं
लॉकडाउन के चलते 350 बसों के पहिए थम गए हैं। इसकी वजह से हर महीने 30 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हर एक बस के पीछे करीब 10 लोगों को काम मिलता है। 3500 से अधिक लोग बेरोजगार भी हो गए हैं। बस ऑपरेटर्स संघ के अध्यक्ष रईस अहमद शकील, शिरीष मिश्रा सहित अन्य संचालकों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या टैक्स और बसों की किस्त को लेकर खड़ी हो गई।

बालोद; टायर, स्टेयरिंग सहित कई पार्ट्स खराब, 112 बसें थमीं
112 बसें वर्तमान में खड़ी हैं। 7 अप्रैल से बसों के पहिए थमे है। बस एम्पलाइंज सोसायटी के अध्यक्ष शेख इमरान ने बताया कि बसों की सीट खराब होकर उखड़ गई है, टायर, स्टेयरिंग सहित कई पार्टस भी खराब हो रहे है। बस के अंदर कचरों का ढेर है। कई पार्टस की चोरी भी गई है। ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी सहित 800 लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। करीब 16 लाख का कारोबार प्रभावित है।

धमतरी; 22 से 25 लाख रुपए का व्यवसाय ठप, 200 बसें थमीं
लॉकडाउन लगने के कारण जिले में करीब 200 बसें खड़ी हैं। इनके खड़े हाे जाने के कारण 22 से 25 लाख रुपए मासिक का व्यवसाय ठप हाे गया है। बसें भी खड़े-खड़े खराब हाे रहीं हैं। जिले में 11 मई रात 12 बजे से सभी 200 बसें खड़ी है। इस बंदी से 600 ड्राइवर, कंडक्टर, खलासी समेत 5000 लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।

महासमुंद; 88.80 लाख रुपए का नुकसान, 185 बसें थमीं
पिछले एक महीने में जिले के ऑपरेटर्स को करीब 88.80 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। जिले में कुल 185 बसें हैंं। बस मालिकों ने परमिट (आई फाॅर्म) परिवहन विभाग को सरेंडर कर दिए हैं। इससे टैक्स में तो राहत है, लेकिन आर्थिक रूप से हानि हो रही है। बस एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चंद्राकर, बस मालिक दिलीप जैन और बसंत राठौर बताते हैं कि 275 से अधिक परिवारों के सामने इन दिनों रोजी-रोटी का संकट है। बस चालक संघ के पदाधिकारी भीखम यादव ने बताया कि जिले में 250 ड्राइवर और कंडक्टर हैं। इसके साथ 25 हेल्पर हैं, जो बेरोजगार हो चुके हैं।

कांकेर; 170 की जगह चल रहीं सिर्फ 5-7 बस, 170 बसें थमीं
लॉकडाउन में बस के आवागमन पर रोक तो नहीं है लेकिन यात्री नहीं मिलने जिले के अंदर चलने वाली बस सेवाएं बंद हो गई है। लाकडाउन लगते ही कांकेर से नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, पखांजुर, दुधावा-नगरी मार्ग में बसों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। केवल रायपुर-जगदलपुर मार्ग में ही दो ट्रेवल्स कंपनियों की 5-7 बसें चल रही है। 10 से 15 मिनट की जगह अब डेढ़ से दो घंटा में बस मिलती है। पहली बस 6.30 बजे कांकेर से रायपुर के लिए छूटती थी लेकिन अब सुबह 10 बजे से पहले बस नहीं है। पहले रायपुर रूट पर 100 बसें रोजाना तथा अन्य मार्ग में 70 बसें चलती थी।

जगदलपुर; 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित, 120 बसें थमीं
लॉकडाउन के चलते बस्तर संभागीय मुख्यालय से चलने वाली करीब 120 बसों की आवाजाही बंद पड़ी है। इसके कारण जहां करीब 650 कर्मचारियों की रोजी-रोटी छिन गई है तो वहीं दूसरी ओर 30 करोड़ रुपए का कारोबार इसके चलते प्रभावित हुआ है। बसों की आवाजाही नहीं होने से सबसे अधिक परेशानी दक्षिण बस्तर के लोगों को हो रही है। रायपुर से इस समय केवल चार बसों की आवाजाही हो रही है। बस्तर प्राइवेट बस एसोसिएशन और ओम नारायण बस ट्रेवल्स के संचालक अनुज सिंह ने बताया कि बस मालिक 3-4 महीने की किस्त जमा नहीं कर पाए हैं।

समझिए… 100 किमी में होता है 2500 तक का मुनाफा

अंतर जिला चलने वाले बसों के 100 किमी के एक फेरे से 2500 तक मुनाफा मिलता है। इसमें ड्राइवर, कंडक्टर और खलासी सहित अन्य का दैनिक भत्ता अतिरिक्त होता है।
एक बस दो फेरे लगाती है तो मुनाफा 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता है । लेकिन लॉकडाउन के चलते बसें बंद पड़ी है। इससे रोजाना उन्हें इसका नुकसान हो रहा है।
वहीं हर बस के पीछे काम करने वाले कम से कम 10 कर्मचारी भी इन दिनों बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट बना खड़ा हो रहा है

छत्तीसगढ़ की राजधानी में बहूत सी जगहों में 12 घंटे से अधिक समय तक लाइट का अता पता नहीं कब तक रहेगी बत्ती गुल हेल्पलाइन नम्बर और बिज़िली विभाग के केंद्र से कोई जवाब नहीं

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रायपुर में आए तूफ़ान और बारिश के कारण लाइट रात भर गोल रही 8 बजे से लाइन का अता पता नहीं है रमज़ान के समय मुसलमानो को रात में 3 बजे से सहेरी करना रहेता है जनता हुयी बहोत परेशान इस समय लोगों ने बिज़िली विभाग में सम्पर्क करने की बहोत सी कोसिस की पर वह से ना कोई जवाब मिल पाया और नाहीं कोई हेल्प्लायन नम्बर काम आया ऐसे में जनता करे तो करे क्या । बहोत मुश्किलों के बाद रात के 8 बजे के बाद सूभा के 9 बजे संपर्क होने पर बताया गया की ट्रान्स्फ़ोर्म पर पेड़ गिर गया है

5 कप्तानो पर CSK अभी से अपना धियान 2022 में होने वाले ऑक्शन पर रखी है

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2008 में, चेन्नई सुपर किंग्स ने पिछले वर्ष टी 20 विश्व कप में अपनी वीरता के बाद एक गतिशील एमएस धोनी को अपना कप्तान नियुक्त किया। धोनी ने सीएसके को किसी भी तरह से नीचे नहीं जाने दिया, उन्हें लगातार 10 सीज़न में प्लेऑफ़ में ले जाया गया।

२०२० में, सुपर किंग्स ने एक संघर्ष किया, क्योंकि वे दूसरे दौर के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहे। हालांकि, 2021 संस्करण में, धोनी और सह वापस अपने सबसे अच्छे स्थान पर थे। जब टूर्नामेंट निलंबित हो गया, तो सीएसके को अपने पहले सात मैचों में पांच जीत के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर रखा गया।

इसलिए, यह कहा जा सकता है कि धोनी के नेतृत्व कौशल में कोई कमी नहीं आई है। लेकिन यह ध्यान में रखते हुए कि वह जुलाई में 40 साल का हो जाएगा, सीएसके को बैकअप की तलाश करनी होगी। यह बिना कहे चला जाता है, धोनी हमेशा के लिए सुपर किंग्स की कप्तानी नहीं करेंगे और टीम को भविष्य में एक नए कप्तान की जरूरत है।

इस लेख में, आइए 2022 की मेगा नीलामी में सीएसके के लिए कप्तानी के पांच विकल्पों पर एक नज़र डालें

1. David Warner

डेविड वार्नर ने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत दिल्ली डेयरडेविल्स, अब कैपिटल से की। हालाँकि, यह सनराइजर्स हैदराबाद के साथ है कि वह अपने अधिकांश लॉरेंस में कामयाब रहे। वह विदेशियों के बीच लीग के इतिहास में अग्रणी अर्धशतक बनाने के साथ-साथ किसी भी खिलाड़ी द्वारा सबसे ज्यादा 50 अर्धशतक भी हैं।

बाएं हाथ के बल्लेबाज ने अपनी उपयोगिता, एक कप्तान के रूप में, एक बल्लेबाज के रूप में, बार-बार दिखाई। इसके अलावा, उनके नेतृत्व में, ऑरेंज आर्मी ने 2016 में पहली बार चैम्पियनशिप जीती। वार्नर ने भी ऑरेंज कैप को काफी बार जीता है और अपनी टीम को प्लेऑफ के माध्यम से निर्देशित किया है।

यह कहे बिना जाता है कि वार्नर के प्रभाव ने सनराइजर्स टीम पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ा है। सुपर किंग्स को उनके नेतृत्व का लाभ मिल सकता है, क्योंकि उन्होंने वर्षों में जो अनुभव प्राप्त किया है।

2. Manish Pandey

मनीष पांडे के पास बहुत अनुभव नहीं है, जो एक आईपीएल टीम का नेतृत्व करता है। हालांकि, उन्होंने घरेलू सर्किट में कर्नाटक की कप्तानी करते हुए अपेक्षाओं को पूरा किया है। 31 वर्षीय ने अपने करियर में कई खिताब जीते हैं, और सुपर किंग्स उनके नए कप्तान के रूप में उनके लिए जा सकते हैं।

जहां तक ​​बल्लेबाजी का सवाल है, वह आईपीएल में पहला भारतीय शतक था जब वह रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेला था। उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए अपनी क्लास भी दिखाई, जहाँ वे गौतम गंभीर के नेतृत्व में फले-फूले।

2018 के बाद से, पांडे सनराइजर्स के लिए अपना व्यापार बढ़ा रहे हैं और बहुत रन बनाए हैं। लेकिन दाएं हाथ के बल्लेबाज को अपने स्ट्राइक रेट के लिए आलोचना का भी सामना करना पड़ा। अनुभवी बल्लेबाज को भी कुछ मैचों के लिए बाहर बैठना पड़ा जिसके बाद उन्होंने टीम में वापसी की।

3. Suryakumar Yadav

सूर्यकुमार यादव के पास टीम की कप्तानी करने का काफी अनुभव है। उन्होंने घरेलू सर्किट में मुंबई का नेतृत्व किया और कोलकाता नाइट राइडर्स के उप-कप्तान के रूप में भी काम किया। 30-वर्षीय ने हाल ही में भारतीय टीम में प्रवेश किया और इससे उन्हें पूरी तरह आत्मविश्वास प्राप्त करना चाहिए।

वह एक बड़ी वजह है कि मुंबई इंडियंस ने क्रमशः 2019 और 2020 में आईपीएल खिताब जीता है। यादव ने एक सलामी बल्लेबाज के रूप में और मध्य क्रम में, अपने कौशल का प्रदर्शन किया है। उनके पास 180 टी 20 मैचों का अनुभव है जिसमें उन्होंने अपने प्रयासों के लिए 21 अर्धशतकों के साथ लगभग 3,900 रन बनाए हैं।

वह रूढ़िवादी शॉट्स खेलता है और अधिक बार नहीं, वे लाभांश का भुगतान करते हैं। सुपर किंग्स किसी भी तरह से ब्लंडर का सबसे बड़ा हिस्सा नहीं बनते हैं, अगर वे उसे रस्सी में डालते हैं और कप्तानी की जिम्मेदारी देते हैं।

4. Steve Smith

स्टीव स्मिथ ने कई सालों तक आईपीएल टीमों और ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की है। उनके कंधे पर एक जिम्मेदार सिर है और उनके सैनिकों को मार्शल करने की क्षमता है। हालाँकि, 2020 में, उनके नेतृत्व में, राजस्थान रॉयल्स प्लेऑफ़ नहीं बना सकी।

वास्तव में, वे अंक तालिका में सबसे नीचे थे और स्मिथ को काफी ईंट-पत्थरों का सामना करना पड़ा। लेकिन इस तथ्य का कि उसके पास एक स्मार्ट क्रिकेटिंग दिमाग है, उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। 2021 में, उन्होंने ऋषभ पंत के नेतृत्व में दिल्ली की राजधानियों के लिए खेला और 30 के दशक में स्कोर हासिल किया। शुरू करने के लिए वह ग्यारहवें हिस्से का हिस्सा नहीं था, लेकिन टीम में अपनी जगह बना ली।

वह गेंद को अंतराल में रखने और एकल और डबल्स लेने में सक्षम था, साथ ही जरूरत के समय में सीमाओं को मंथन कर रहा था। यदि सुपर किंग्स उसे ड्राफ्ट कर सकते हैं, तो यह टीम के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है

5. Ishan Kishan

बांग्लादेश में U19 विश्व कप में उपविजेता के रूप में भारत के समाप्त होने के बाद इशान किशन 2016 में सामने आए। उसी वर्ष, अब-विचलित गुजरात लायंस ने उन्हें एक अनुबंध दिया। उन्होंने सुरेश रैना के नेतृत्व वाली इकाई के लिए अच्छी बल्लेबाजी की जिसके बाद वह 2018 में मुंबई इंडियंस के लिए चले गए।

तब से, उनके करियर में ऊपर की ओर रुझान देखा गया है और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में भी प्रवेश कर लिया है। दक्षिणपन्थी अपने निडर दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं और गेंदबाजी आक्रमण को लय में नहीं आने देते। इरादे ने उसे हंसी के भार से अर्जित किया है।

धोनी की अगुवाई वाली सीएसके अपने कप्तानी के उद्देश्य से उनमें निवेश कर सकती है। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने भारत U19 का नेतृत्व किया और घरेलू सर्किट में झारखंड की कप्तानी भी की। किशन किसी भी टीम के क्रिकेट के अपने नए ब्रांड के साथ अपना दृष्टिकोण बदल सकते हैं।

पिंक ऑटो एंबुलेंस मदर्स डे पर माताओं को एंबुलेंस की कमान जरूरतमंदों के लिए ऑक्सीजन की सुविधा शहर के 10KM के दायरे में मिलेगी फ्री

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कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें बड़ी दिक्कत मरीज को अस्पताल तक ले जाने में हो रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रविवार से पिंक ऑटो एंबुलेंस की शुरुआत की गई है। खास बात यह है कि यह एंबुलेंस पूरी तरह से ऑक्सीजन सपोर्ट सुविधा के साथ है और इसकी ड्राइवर महिलाएं हैं। ये गरीब परिवारों को निशुल्क सेवा देगी।

दरअसल, रोटरी क्लब की ओर से बिलासपुर में पहले से ही पिंक लाइन ऑटो चल रही हैं। इन्हीं ऑटो को अब एंबुलेंस का रूप दे दिया गया है। इनकी ड्राइवर माताएं हैं। महामारी के समय में अपने इस सहयोग से वे जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए वह मरीज को अस्पताल और वहां से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसका मकसद जो मजबूर लोगों की मदद करना है। यह सेवा शहर के 10 किमी के दायरे में मिलेगी।

रोटरी क्वींस के सहयोग से शहर में पिंक लाइन ऑटो सर्विस पिछले 2 साल से चल रही है। इनमें बहनों और महिलाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है।

यह सुविधा मिलेगी एंबुलेंस में, नंबर किए गए जारी
पिंक ऑटो एंबुलेंस में सभी महिला ड्राइवर PPE किट पहनकर सेवाएं देंगी। इसके अलावा उसमें ऑक्सीजन, सैनिटाइजेशन, ग्लव्ज, PPE किट, मास्क शील्ड और दवाइयों की भी सुविधा दी गई है। वहीं ड्राइवर और मरीज के बीच पार्टिशन के लिए पर्दे भी लगाए गए हैं। यह सेवा सुबह 9 बजे से लेकर रात 9 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इसके लिए कोई भी 73892-87757, 62666-19432, 62667-82775, 62682-14342, 78058-29747 और 79700-79025 नंबर पर संपर्क कर सकता है।

रोटरी क्वींस के सहयोग से शहर में पिंक लाइन ऑटो सर्विस पिछले 2 साल से चल रही है। इनमें बहनों और महिलाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। कोरोना महामारी को देखते हुए इसकी चालक माताओं ने लोगों की सेवा करने का निश्चय किया। इसके लिए 6 ऑटो में फिलहाल सुविधा दी गई है। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जाएगा।

पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 35 के प्रथम नागरिक पार्षद एम आई सी सदस्य आकाश तिवारी द्वारा जरूरतमंद लोगों के घर पहुंचाया गया अंडा…

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{खुलासा छत्तीसगढ़} 9 मई 2021 रायपुर
पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 35 के प्रथम नागरिक एवं एमआईसी सदस्य पार्षद आकाश तिवारी द्वारा उनके वार्ड वासियों की सहायता हेतु सुपर थर्टी टीम ,उनके आदेश अनुसार टीम के 30 सदस्य अलग-अलग जगहों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं वार्ड में बहुत सारे ऐसे परिवार है जो रोज कमाओ रोज खाओ की जिंदगी जीते हैं इस कोरोना काल में उनके लिए विशेष ध्यान मैं रखकर कार्य योजना बनाई गई हैI अपने परिवार की तरह सोच कर उन्होंने पूरे वार्ड वासियों की जरूरतमंद चीजों को उनके घर तक पहुंचाए

18+ टीकाकरण का नया फार्मूला तैयार, एक सेंटर पर चार कैटेगरी में लगेगा कोरोना का टीका छत्तीसगढ़ में

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{खुलासा छत्तीसगढ़}रायपुर..
तस्वीर बिरगांव के आडवाणी स्कूल स्थित कोरोना टीकाकरण केंद्र का है। यहां सुबह से ही सैकड़ों लोग टीका लगवाने के लिए लाइन में खड़े हैं। ऐसा ही नजारा प्रदेश के दूसरे केंद्रों पर भी दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने कोरोना टीकाकरण में प्राथमिकता का नया फार्मूला तय कर लिया है। इसके तहत अब टीकाकरण के एक केंद्र पर एक साथ चार कैटेगरी में टीका लगाया जाएगा। अन्त्योदय, गरीबी रेखा से नीचे और सामान्य श्रेणी के लोगों के अलावा सरकार ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों, सरकारी कर्मचारियों, पत्रकारों और संक्रमण के सबसे अधिक खतरे वाले कामगारों के लिए चौथी कैटेगरी बनाई है।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया, “टीकाकरण का अनुपात तय हो गया है जल्द ही इसके आदेश जारी हो जाएंगे।” प्रदेश में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए नि:शुल्क टीकाकरण अभियान 1 मई से शुरू हुआ है। सरकार ने सबसे पहले अन्त्योदय राशनकार्ड वालों को टीका लगाना शुरू कर दिया था। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इसको उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। 4 मई को अदालत ने कहा कि इस तरह टीकाकरण गलत है। बीमारी अमीरी-गरीबी देखकर नहीं आती। ऐसे में सरकार को सभी वर्गों में अनुपात तय करना चाहिए। उसके बाद टीकाकरण को रोक दिया गया। बाद में उच्च न्यायालय के कहने पर शनिवार से फिर टीकाकरण शुरू हुआ। इस बीच मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में बनी सचिवों की उच्च स्तरीय समिति ने टीकाकरण में सभी वर्गों का यह अनुपात तय किया है।

अब यह होगा अनुपात

वर्क फोर्स + गंभीर बीमारी से पीड़ित– 20%
गरीबी रेखा से नीचे – 52%
अन्त्योदय – 16%
गरीबी रेखा से ऊपर~12%

अब पत्रकार, वकीलों और उनके परिजनों को भी फ्रंट लाइन वर्कर के समान टीकाकरण में मिलेगी प्राथमिकता… छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला…

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रायपुर: मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण के लिए अहम घोषणा की है जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के लोगों को फ्रंट लाइन वर्कर मानते हुए उनके टीकाकरण करने का निर्णय लिया गया है। राज्य के पत्रकार और वकीलों तथा उनके परिजनों को भी फ्रंट लाइन वर्कर के समान ही टीकाकरण करने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहले ही निर्देश दे दिए गए थे, परंतु मामला न्यायलयीन होने के कारण लंबित था। कई अन्य राज्यों में पत्रकारों और वकीलों को फ्रंट लाइन वर्कर मानते हुए उनका टीकाकरण किया जा रहा है, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए राज्य के पत्रकारों और वकीलों के साथ ही उनके परिजनों को भी फ्रंट लाइन वर्कर के समान टीकाकरण में प्राथमिकता देने की घोषणा की है।

अज्ञान्ता वश नशे की नियत से सिरप पीना पड़ गया भारी जानिए पूरी घटना।

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडरी इलाके में जहरीली सीरप पीने से 3 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में 2 सगे भाई थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर के सिविल लाइन थाना इलाके के ताज नगर में 04 दोस्तों ने पार्टी में शराब के नाम पर जहरीली सिरप पी ली, जिससे उनमें 03 दलविंदर सिंह परमार, बलविंदर सिंह परमार और मनीष वर्मा की मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि उनके द्वारा सीरप किसी होमियोपैथी दुकान से लाकर पी थी। मृतकों में 02 सगे भाई हैं, जबकि अन्य 02 उनके साथी है। पुलिस इस मामले में जांच शुरू कर दी है।