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जानिए लॉकडाउन में 5 बजे तक किन सेवाओ को मिली छूट ।

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रायपुर:  लॉकडाउन को लेकर राज्य सरकार ने दिशा निर्देश जारी कर दिया है, छत्तीसगढ़ के  लगभग सभी जिलों में 15 मई तक लॉकडाउन बढ़ेगा।राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले में लोगों को अतिरिक्त छूट मिलेगी। बस्तर संभाग के जिलों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं, आंध्रप्रदेश में नए स्ट्रेन के वायरस मिलने पर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, राज्य की सीमा को अच्छे से निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टर्स को गाइडलाइन जारी कर दी है। वहीं, प्रशासन ने कुछ सेवाओं को शाम 5 बजे तक छूट देने का निर्देश जारी किया है।

इन सेवाओं को मिलेगी छूट

1. कृषि क्षेत्र – बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रों की दुकानों और उनकी मरम्मत के लिए दुकानें / गोदाम खोलना। उर्वरक ट्रकों की आवाजाही।

2. किराना दुकानें खुल सकती हैं (लेकिन मौहल्लों में केवल स्वतंत्र प्रतिष्ठान, और मॉल और सुपरमार्केट में नहीं)

3. शारीरिक रूप से दुकानें खोलने के बिना, केवल होम डिलीवरी के माध्यम से दैनिक जरूरतों / प्रावधान स्टोर (मौहल्ले और सुपरमार्केट में उन लोगों के लिए स्वतंत्र प्रतिष्ठान जिनके पास नहीं हैं)

4. बैंकों और डाकघरों को 50% जनशक्ति के साथ खोलने के लिए – केवल व्यापार लेनदेन के लिए, सभी प्रकार के व्यवसायों के लिए।

5. डाक / डाक सेवाओं के लिए कूरियर सेवाएं (ई-कॉमर्स के लिए नहीं)

6. इलेक्ट्रीशियन / प्लंबर एसी, कूलर, सैनिटरी फिटिंग की घरेलू सेवाओं / मरम्मत के लिए। इसके अलावा उनकी मरम्मत की दुकानें।

7. एसी, पंखे, कूलर (बिना दुकानें खोले) की होम डिलीवरी।

8. पेट्रोल पंप – सभी उद्देश्यों के लिए खोलना, और बिना समय की पाबंदी के।

9. गैस एजेंसियां ​​- खोलना।

10. पोल्ट्री, मांस, अंडा, दूध, डेयरी और डेयरी उत्पादों की दुकानें।

11. आटा मिल्स (अता चाकी)।

12. रजिस्ट्री कार्यालय खोलने के लिए, न्यूनतम कर्मचारियों और टोकन प्रणाली (50% कर्मचारियों के साथ, पिछले साल की तरह)।

13. अन्य केवल ऑनलाइन होम डिलीवरी की अनुमति है।

14. फल और सब्जी के तोले, फेरी करते हुए।

15. सभी श्रम गहन कार्य और सभी साइट पर काम करता है – पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, पीएचई, वन, पी एंड आरडी / आरईएस / मनरेगा, आदि से संबंधित।

सिटी हॉस्पिटल पार्किंग संचालक रवि डोंगरे की अनूठी पहल व्यस्तता भरे पार्किंग के काम के बीच करते हैं निःशुल्क गर्म पानी बाटने का काम

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रायपुर। मन में सेवा भाव हो तो इंसान किसी भी तरीके से परोपकार करता है व्यस्तता भरे पार्किंग के काम के बीच सिटी हॉस्पिटल के पार्किंग संचालक रवि डोंगरे लोगो को पानी गर्म करके बांटते हैं।

पिछले वर्ष जब से कोरोना का संक्रमण फैला है सिटी हॉस्पिटल में बहार से आने वाले सभी आगंतुकों को मास्क लगाने के लिए सतर्क करना और स्वस्थ विभाग द्वारा गर्म पानी पिने के गाइड लाइन जारी करने के बाद से लोगो को निःशुल्क गर्म पानी बाटने का काम कर रहे हैं।

शादी के 27 साल बाद लिया तलाक का फैसला बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने,

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नई दिल्ली : माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के संस्थापक बिल गेट्स अपनी पत्नी मेलिंडा गेट्स से तलाक लेंगे। बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने एक साझा बयान जारी कर ये घोषणा की है। शादी के 27 साल बाद बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने एक-दूसरे से तलाक लेने का फैसला किया है। दोनों ने एक साझा बयान में कहा है, ”हमने अपनी शादी को अब खत्म करने का फैसला किया है। हमें अब विश्वास नहीं है कि हम अपने जीवन के अगले चरण में एक कपल के रूप में आगे बढ़ सकते हैं। हमें नहीं लगता कि हम एक साथ रह सकते हैं।” बिल गेट्स ने अपने ट्विटर पर इस बात की जानकारी दी है।

बिल गेट्स ट्वीट कर कहा है, ”बहुत ज्यादा सोच-विचार करने और हमारे रिश्ते पर काम करने के बाद ही हमने अपनी शादी को अब खत्म करने का फैसला लिया है। हम बतौर कपल अब साथ में नहीं रहना चाहते हैं।” बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स के तीन बच्चे हैं। बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स की मुलाकात 1980 के दशक में हुई थी, जब मेलिंडा ने माइक्रेसॉप्ट कंपनी ज्वाइन की थी।

”हम काम साथ करेंगे लेकिन कपल के तौर पर नहीं रह सकते”

बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने साझा बयान में कहा, ”पिछले 27 वर्षों में, हमने तीन बच्चों की परवरिश की और एक ऐसी नींव तैयार की जो पूरी दुनिया में काम करती है ताकि सभी लोग स्वस्थ जीवन जी सकें। हम आपको विश्वास जताते हैं कि हम एक साथ अपना काम जारी रखेंगे। लेकिन हमें अब विश्वास नहीं है कि हम अपने जीवन के अगले चरण में एक कपल के रूप में एक साथ रह सकते हैं। हम अपने परिवार के आपसे प्राइवेसी मांगते हैं, ताकी हम अपने इस जीवन की शुरुआत कर सके।”

एक-दूसरे को कैसे मिले बिल गेट्स और मेलिंडा

मेलिंडा ने 1987 माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में एक प्रोडक्ट मैनेजर की पद पर काम करने आई थीं। उसी दौरान मेलिंडा बिग गेट्स के साथ न्यूयॉर्क में एक बिजनेस डिनर पर मिली थीं। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। बिल गेट्स ने एक नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री को बताया, जब मैं और मेलिंडा एक-दूसर को डेट कर रहे थे तो हमारे बीच ऐसी परिस्थियां बन गई थी कि या तो हम ब्रेकअप कर अलग हो जाते या फिर हम शादी करते। लेकिन हम दोनों एक दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे।

बिल गेट्स और मेलिंडा ने 1994 में लानई के हवाई द्वीप पर शादी की। कहा जाता है कि अनचाहे मेहमान उस शादी में ना आ सके इसलिए सभी स्थानीय हेलीकॉप्टरों को बिल गेट्स ने किराए पर ले लिया था। इनके तीन बच्चे हैं, जो संयुक्त रूप से बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन चलाते हैं।

रायपुर में जारी रहेगा लॉकडाउन,सुबह 6-12 बजे तक खुल सकती हैं दुकाने, होम डिलीवरी को प्राथमिकता, कलेक्टर शाम तक कर सकते है घोषणा।

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छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में राजधानी रायपुर में लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा या नहीं इस पर संशय बरकरार है।
खुलासा छत्तीसगढ़ के विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि अगले एक हफ्ते से काम से कम 10 दिन तक का लॉकडाउन लगेगा ही पर थोड़ी छूट मिलने की संभावना है।

रायपुर जिले के कलेक्टर एस भारतीदासन लगातार चेंबर ऑफ कॉमर्स समेत कई व्यापारिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। इसके साथ ही आज दिन भर कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ समेत जिले के जिले के तमाम बड़े अधिकारी बैठक करके किन शर्तों को प्राथमिकता मिले और लोगों को कहां रियायत दिया जाए, इन तमाम विषयों को लेकर मंथन करेंगे हो सकता है शाम 4 बजे तक कलेक्टर नए नियमों के साथ घोषणा कर दे।

सुबह 6 से 12 बजे तक खुलेंगे दुकान, होम डिलेवरी को परत्मिक्ता होगी
सूत्रों के मुताबिक रायपुर में सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक किराना, ग्रोसरी दुकानों समेत कई अतिआवश्यक दुकानों को खोलने की अनुमति शर्तों के साथ दी जाएगी। इसके साथ ही मिलकर डॉट इन, जोमैटो, स्विगी समेत कई ऑनलाइन डिलीवरी सर्विसेस को भी होम डिलीवरी की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिला प्रशासन यह प्रयास में है कि लोग घरों से बाहर न निकलें, दुकानों तक ना आयें, ऐसे में यह नियम भी जारी किया जाएगा कि ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन सर्विसेज का इस्तेमाल जिला प्रशासन करे और लोगों को जरूरत के सामान, किराना, राशन, फ़ूड समेत कई सामान घरों तक पहुंचाया जाए, जिससे लोग घरों से बाहर ना निकलें और कोरोना संक्रमण का खतरा ना बना रहे।

थोड़ी राहत, थोड़ी सख़्ती होगी
सूत्रों के मुयबिक आज दोपहर लगभग 4 बजे नये नियमावली के साथ कलेक्टर आदेश जारी करेंगे। जिसमें कई बिंदुओं के आधार पर जहां कई मामलों में व्यापारियों, दुकानदारों को राहत भी मिलेगी। वहीं कोरोना गाइडलाइंस के नियमों के सख्ती से पालन कराने के लिए भी प्रशासन इस आदेश में लोगों से अपील करेगा।

शराब नही मिली तो चार दोस्तो ने पी ली सेनेटाइजर ,2 की हालत गंभीर

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रायपुर शहर में शराब की जगह सैनिटाइजर पीने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो अन्य की हालत गंभीर है। शहर के लाल गंगा शॉपिंग मॉल के पीछे की राजीव आवास बस्ती में रविवार की रात 4 लोगों ने शराब की जगह नशे के लिए सैनिटाइजर पी लिया। तबीयत बिगड़ी तो घर वाले इन्हें अंबेडकर अस्पताल लेकर भागे। सोमवार की सुबह अब दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है। राजू छुरा, विजय चौहान नाम के युवकों की इलाज के दौरान जान चली गई। इनके साथ सैनिटाइजर पीने वाले चंदन तिवारी और अनिल छेडिया की भी हालत गंभीर बताई जा रही है।

शराब नहीं मिली इसलिए पिया सैनिटाइजर
गोल बाजार थाने की पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है। अब तक हुई जांच में ये बात सामने आई कि सैनिटाइजर से नशा करने की बात युवकों ने कहीं से सुनी। इसके बाद उन्होंने शराब न मिलने की वजह से इसे पीने का मन बना लिया। रविवार की रात साथ बैठे और सैनिटाइजर पी लिया। सैनिटाइजर का इस्तेमाल सिर्फ हाथों को साफ करने के लिए होता है। इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी ने शराब की बोतल में ही तो इन्हें सैनिटाइजर नहीं दे दिया ? फिलहाल पुलिस आस-पास पूछताछ कर रही है।

पिछले साल भी हुई थी युवकों की मौत
बांस टाल इलाके में ही पिछले साल दो युवकों की इसी वजह से मौत हो गई थी। तब असगर हुसैन (42) और दिनेश सेंद्रे (45) नाम के व्यक्ति इलाज के दौरान जान गंवा बैठे थे। तब भी आस-पास के लोगों से पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि मृतक शराब पीने की आदी थे। पिछले कुछ दिनों से लॉकडाउन की वजह से शराब दुकानें बंद थीं। ऐसे में इन्होंने हैंड सैनेटाइजर को शराब समझकर पी लिया। पिछले साल एक शराब के ब्रांड वाली गोवा कंपनी सैनिटाइजर पर वैसा ही लोगाे लगाकर बेच रही थी जिसे बाद में बदला गया

रायपुर के 2 बड़े हॉस्पिटल को CMHO थमाया नोटिस ,खली बेड होकर भी कह रहे थे बेड नहीं

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रायपुर: कोरोना संक्रमण के बीच राजधानी रायपुर के दो बड़े अस्पतालों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि बेड खाली होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी। मामले में संज्ञान लेते हुए रायपुर सीएमएचओ ने दोनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।मिली जानकारी के बालाजी और हेरिटेज हॉस्पिटल ने मरीजों को बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी, जबकि अस्पताल में बेड खाली थे। गलत जानकारी देने के चलते रायपुर सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

7 दिन या उससे अधिक बढ़ेगा लॉक डाउन ?

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रायपुर: राजधानी सहित छत्तीसगढ़ के बहुत सारे जिलों में करीब 24- 25 दिनों से लॉक डाउन लगा रखा है जिसके फलस्वरुप कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आने पर अब सरकार लॉकडाउन में कुछ राहत देने की तैयारी में हैं , चर्चा है कि रायपुर में 5 मई के बाद बहुत सारे व्यवसाय में छूट के साथ लॉकडाउन 7 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है ।

इस समय रायपुर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 4400 से घटकर 1000 तक पहुंच गया है मौत की संख्या में भी कमी आई है। दुर्ग में भी स्थिति सुधर रही है। ऐसी स्थिति में अब रायपुर ,दुर्ग सहित कुछ शहर जिलों में जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी हुई है वहां पर लॉकडाउन में कुछ छूट देने की तैयारी की जा रही है।
चर्चा के अनुसार किराना , अनाज , फल सब्जी मटन ,पशु चारे की दुकानों के अलावा कपड़े और ज्वेलरी के दुकानों में कुछ घंटे की छूट के साथ लॉकडाउन सप्ताह भर के लिए बढ़ाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स बना रहा दबाव

छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स बहुत व्यापारी संगठन के साथ सरकार पर इसके लिए दबाव बना रहा है। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स और व्यापारिक संगठनों के सभी व्यापारिक संस्थानों को दोपहर 3 बजे तक खोलने की छूट के साथ लॉकडाउन लगाने की मांग की है। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है।

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सुशील आनंद शुक्ला

कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि लॉकडाउन किस तरह से बढ़ाया जाए , कितनी छूट दी जाए इस पर व्यापारियों व अधिकारियों के साथ चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा ।ऐसा रास्ता निकाला जाएगा कि कोरोना की चेन टूटे और व्यापार का नुकसान भी न हो , लोग भी परेशान न हो।

ब्रिज मोहन अग्रवाल

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन को लेकर सरकार को काफी सोच विचार कर निर्णय लेना होगा। रायपुर सहित कुछ जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या कम हुई हैं लेकिन अभी स्थिति सुधरी नहीं है। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी चूक से स्थिति बिगड़ सकती है। आम लोगों का भी कहना है कि सरकार को गरीब और छोटे व्यापारियों की तकलीफों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन बढ़ाना चाहिए।


जिस तरह से रायपुर रायपुर ,दुर्ग सहित कुछ जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आई है और व्यापारियों का दबाव आ रहा है उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार 6 मई से कुछ व्यवसाय में छूट देकर लॉक डाउन सप्ताह भर के लिए बढ़ा सकती है। लेकिन इसके पहले सरकार को इस तरह की व्यवस्था करनी होगी कि बाजार में भीड़भाड़ की स्थिति न निर्मित हो।

कौन सी वैक्सीन सबसे अच्छी COVID-19 से लड़ने के लिए- कोवीशील्ड, कोवैक्सिन या स्पुतनिक V? जानिए इनके बारे में सब कुछ

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कोरोना की दूसरी लहर को काबू करने और जल्द से जल्द पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने की दिशा में 1 मई से 18+ को वैक्सीन लगाने की शुरुआत हो गई है। राज्यों में वैक्सीन डोज के अभाव में एक-दो दिन में शुरुआत होगी। पर जो वैक्सीन इस्तेमाल हो रही है या लगने वाली है, उसके बारे में जानना भी जरूरी है। इस बीच, यह बहस भी शुरू हो गई है कि कौन-सी वैक्सीन ज्यादा बेहतर है- कोवीशील्ड या कोवैक्सिन? फिर तीसरी रूसी वैक्सीन- स्पुतनिक V भी तो उपलब्ध होगी ही।

खबरों के मुताबिक यह तीनों ही वैक्सीन भारत के कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान में शामिल होंगी। वैसे भी कोवीशील्ड और कोवैक्सिन तो 16 जनवरी से ही इस्तेमाल हो रही है। अच्छी बात यह है कि तीनों ही वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाने और मौत टालने में 100% इफेक्टिव हैं। इसी वजह से दुनियाभर के वैज्ञानिक कह रहे हैं कि जो भी वैक्सीन उपलब्ध हो, उसका डोज लगवा लें। यह आपकी जान बचाने के लिए जरूरी है। पर फिर भी तीनों वैक्सीन के बारे में यह जानकारी आपको होना चाहिए…

तीनों में कौन-सी वैक्सीन बेहतर है?
तीनों ही अच्छी हैं। जो मिले, लगवा लो। भारत के कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान में 16 जनवरी से ही कोवैक्सिन और कोवीशील्ड का इस्तेमाल हो रहा है। कोवैक्सिन को पूरी तरह से भारत में ही विकसित और बनाया जा रहा है। कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर विकसित किया और अब पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है।

वहीं, 1 मई को कोरोना के खिलाफ युद्ध में शामिल होने भारत पहुंची रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V को मॉस्को के गामालेया इंस्टीट्यूट ने रशियन डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ मिलकर बनाया है। भारत में हैदराबाद की डॉ. रेड्डी लैबोरेटरी की निगरानी में 6 कंपनियां इसका प्रोडक्शन करने वाली हैं। शुरुआती 1.25 करोड़ डोज इम्पोर्ट होने वाले हैं।

इन तीनों ही वैक्सीन में कुछ असमानताएं हैं और लाभ भी, जो इन्हें एक-दूसरे से अलग करती है। कोवीशील्ड दुनिया की सबसे लोकप्रिय वैक्सीन में से है, जिसका इस्तेमाल ज्यादातर देशों में हो रहा है। WHO भी इसके इस्तेमाल की आपात मंजूरी दे चुका है। वहीं, कोवैक्सिन इस समय सिर्फ भारत में इस्तेमाल हो रही है, पर म्यूटेंट स्ट्रेन्स के खिलाफ सबसे प्रभावी और असरदार वैक्सीन बनकर उभरी है। इसी तरह स्पुतनिक V को भी भारत समेत 60 से अधिक देशों ने अप्रूवल दिया है।

यह वैक्सीन कैसे बनी हैं?
कोवैक्सिन को पारंपरिक इनएक्टिवेटेड प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। यानी इसमें डेड वायरस को शरीर में डाला जाता है, जिससे एंटीबॉडी रिस्पॉन्स होता है और शरीर वायरस को पहचानने और उससे लड़ने लायक एंटीबॉडी बनाता है।

कोवीशील्ड एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है। इसमें चिम्पांजी में पाए जाने वाले एडेनोवायरस ChAD0x1 का इस्तेमाल कर उससे कोरोना वायरस जैसा ही स्पाइक प्रोटीन बनाया गया है। यह शरीर में जाकर इसके खिलाफ प्रोटेक्शन विकसित करता है।

स्पुतनिक V भी एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है। पर अंतर यह है कि इसे एक के बजाय दो वायरस से बनाया गया है। इसमें दोनों डोज अलग-अलग होते हैं। जबकि कोवैक्सिन और कोवीशील्ड के दो डोज में अंतर नहीं है।

कितने डोज कितने हफ्तों के अंतर से लेने हैं? 
तीनों ही वैक्सीन दो डोज वाली हैं। यानी इम्यून रिस्पॉन्स के लिए दो डोज लेना जरूरी है। यह वैक्सीन इंट्रामस्कुलर है। यानी कंधे के पास हाथ पर इंजेक्शन लगाए जाते हैं।

कोवैक्सिन के दो डोज 4 से 6 हफ्ते के अंतर से लगाए जाते हैं। कोवीशील्ड के दो डोज 6-8 हफ्ते के अंतर से लगाए जा रहे हैं। वहीं स्पुतनिक V के दो डोज के बीच तीन हफ्ते यानी 21 दिन का अंतर रखना है।

भारत में शुरुआत में कोवीशील्ड के दो डोज में 4-6 हफ्ते का अंतर रखा गया था। पर ट्रायल्स में यह सामने आया है कि कोवीशील्ड का दूसरा डोज जितनी देरी से देते हैं, उसकी इफेक्टिवनेस उतनी ही बढ़ जाती है।

यह तीनों ही वैक्सीन भारत के मेडिकल सेट-अप के लिए उचित है। 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर इन्हें स्टोर किया जा सकता है। इसके मुकाबले अमेरिका समेत कई देशों में इस्तेमाल हो रही फाइजर और मॉडर्ना की mRNA (मैसेंजर आरएनए) वैक्सीन को स्टोर करने के लिए -70 डिग्री सेल्सियस का तापमान चाहिए होता है।

यह वैक्सीन कितनी इफेक्टिव हैं?
जब बात इफेक्टिवनेस की आती है तो यह तीनों ही वैक्सीन काफी इफेक्टिव हैं। WHO के स्टैंडर्ड्स पर तीनों ही खरी उतरती हैं। अभी भी क्लीनिकल ट्रायल्स के डेटा आ रहे हैं और इस वैक्सीन के असर के बारे में स्टडी जारी है।

कोवीशील्ड के ट्रायल्स पिछले साल नवंबर में खत्म हुए थे। इसकी एफिकेसी यानी इफेक्टिवनेस रेट 70% है, जो डोज का अंतर बढ़ाने पर बढ़ता है। यह वैक्सीन न केवल गंभीर लक्षणों से बचाती है बल्कि रिकवरी समय को भी घटाती है।

कोवैक्सिन के ट्रायल्स इसी साल हुए हैं। अप्रैल में आए दूसरे अंतरिम नतीजों में यह 78% इफेक्टिव साबित हुई है। खास बात यह है कि यह वैक्सीन गंभीर लक्षणों को रोकने में और मौत को टालने में 100% इफेक्टिव है।

स्पुतनिक V इस पैमाने पर भारत की सबसे इफेक्टिव वैक्सीन है। मॉडर्ना और फाइजर की mRNA वैक्सीन ही 90% अधिक इफेक्टिव साबित हुई हैं। इसके बाद स्पुतनिक V ही सबसे अधिक 91.6% इफेक्टिव रही है।

इन वैक्सीन की कीमत और उपलब्धता की क्या स्थिति है?
कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जल्द ही खुले बाजार में उपलब्ध होगी। राज्य सरकारें भी इन्हें खरीदकर अपने यहां इस्तेमाल कर सकेंगी। वहीं, स्पुतनिक V के भी जल्द ही बाजार में उपलब्ध होने के संकेत मिले हैं।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने राज्य सरकारों के लिए कोवीशील्ड के एक डोज की कीमत 300 रुपए और प्राइवेट अस्पतालों के लिए 600 रुपए तय की है। वहीं, कोवैक्सिन थोड़ी महंगी है। राज्य सरकारों को यह 400 रुपए और प्राइवेट अस्पतालों में 1,200 रुपए प्रति डोज उपलब्ध होगी।

वहीं, स्पुतनिक V को डेवलप करने में मदद करने वाले RDIF के प्रमुख दिमित्रेव के मुताबिक यह वैक्सीन 10 डॉलर यानी 700 रुपए में उपलब्ध होगी। फिलहाल उसने राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों को दिए जाने वाले रेट्स का खुलासा नहीं किया है।

हालांकि, इन वैक्सीन के लिए आपके जेब से पैसा कितना जाएगा, यह केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के साथ ही आपके फैसले पर निर्भर करेगा कि आप प्राइवेट में टीका लगवाना चाहते हैं या सरकार से। 24 राज्य अब तक घोषणा कर चुके हैं कि वे 18+ नागरिकों को फ्री में टीका लगवाएंगे।

नए वैरिएंट्स पर यह वैक्सीन कितने प्रभावी हैं?
कोरोना वायरस के कई नए म्यूटेंट स्ट्रेन्स कई देशों में हैं। यूके केंट स्ट्रेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के साथ ही डबल म्यूटेंट और ट्रिपल म्यूटेंट स्ट्रेन कई देशों में मिले हैं। इन म्यूटेंट्स ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक सिर्फ यह ही साबित हुआ है कि कोवैक्सिन इन सभी वैरिएंट्स के खिलाफ कारगर है।

कोवीशील्ड और स्पुतनिक V को लेकर अब तक इस तरह का कोई दावा या स्टडी सामने नहीं आए हैं। इसके बाद भी विशेषज्ञों का मानना है कि जो भी हमारे पास उपलब्ध हो, वह वैक्सीन डोज लेना जरूरी है। इस तरह से ही आप नए म्यूटेंट स्ट्रेन्स और वैरिएंट्स को फैलने से रोक सकेंगे।

इन वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
तीनों ही वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स एक-से हैं। यह तीनों ही वैक्सीन इंट्रा-मस्कुलर होने से हाथ में काफी अंदर तक सुई जाती है। इससे इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सूजन बेहद आम है। इसी तरह हल्का बुखार, हल्की सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, हाथ-पैर का दर्द भी हो सकता है। घबराएं नहीं। डॉक्टर से परामर्श लें और लक्षण के अनुसार दवा लें।

किन लोगों को कौन-सी वैक्सीन नहीं लगवानी है और क्यों?
जिन लोगों को किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ या दवाओं की एलर्जी है, उन्हें वैक्सीन नहीं लगानी है। उन्हें अपने डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए। इसी तरह अगर एक डोज लेने पर कोई जटिलता आती है तो दूसरा डोज लेने से पहले ठहरें। डॉक्टर से बात करें, तब ही कोई फैसला लें।

जिन लोगों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या प्लाज्मा थैरेपी दी गई है, उन्हें भी फिलहाल वैक्सीन नहीं लगवानी है। जिन लोगों को प्लेटलेट्स कम हैं या जिन्होंने स्टेरॉइड ट्रीटमेंट लिया है, उन्हें वैक्सीन का डोज देने के बाद निगरानी के लिए कहा जा रहा है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करा रही महिलाओं को वैक्सीन के डोज फिलहाल लेने से मना किया गया है। साथ ही, जिन लोगों में कोरोना के लक्षण हैं या जो पूरी तरह रिकवर नहीं हुए हैं, उन्हें भी थोड़ा रुककर वैक्सीन के डोज लेने की सलाह दी गई है।

इन वैक्सीन का असर कितने दिन तक रहेगा?

पता नहीं। ये सभी वैक्सीन बहुत कम समय में बनी हैं। ये कितने दिन तक असर दिखाएंगी, इसके तो ट्रायल्स हुए ही नहीं है। इसी वजह से कहना बड़ा मुश्किल है कि कितने समय तक इनका असर रहेगा। फिर भी कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि कोरोना के खिलाफ बनी एंटीबॉडी 9 से 12 महीने तो कम से कम इफेक्टिव रहेगी ही। वैसे, हाल ही में फाइजर की वैक्सीन को लेकर यह बयान जारी हुआ है कि सालभर के अंदर तीसरा डोज लगाने की जरूरत पड़ सकती है। इसे देखते हुए फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचना संभव नहीं लग रहा। फिलहाल जानकारी इतनी ही है कि यह वैक्सीन मौजूदा संकट से दूर रखने में कारगर है।

और आखिर में…
अच्छी बात यह है कि तीनों ही वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों और मौतों को रोकने में पूरी तरह सक्षम हैं। दो डोज लेने पर आपके शरीर में इतनी एंटीबॉडी बन चुकी होती हैं कि कोरोना इन्फेक्शन होने पर उससे लड़ सकें। अगर दो डोज लिए हो तो इन्फेक्शन हुआ तो भी वह सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा होगा। और, काफी कम दिनों में ठीक भी हो जाएगा।

IPL 2021, KKR vs RCB: कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच का मैच हुआ आज रद् क्योंकि 2 KKR के खिलाड़ियों को निकला Covid-19 पॉज़िटिव

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नई दिल्ली: अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के बीच इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का मुकाबला आज (सोमवार, 3 मई) खेला जाना था। दो केकेआर टीम के सदस्यों को covid -19 के रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी ।
आईपीएल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “2 केकेआर के खिलाड़ियों के सकारात्मक परीक्षण के बाद 3 मई, 2021 को केकेआर-आरसीबी मैच के लिए आईपीएल का पुनर्निर्धारण किया गया। वरुण चकरवार्थी और संदीप वारियर को परीक्षण के तीसरे दौर में सकारात्मक पाया गया। पिछले चार दिन। टीम के अन्य सभी सदस्यों ने COVID -19 के लिए नकारात्मक परीक्षण किया है। ” “दोनों खिलाड़ियों ने बाकी टीम से खुद को अलग कर लिया है। मेडिकल टीम दोनों के साथ लगातार संपर्क में है और उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। इस बीच, कोलकाता नाइट राइडर्स अब किसी अन्य संभावित मामलों की पहचान करने के लिए दैनिक परीक्षण दिनचर्या की ओर बढ़ गयी है। जल्द से जल्द उनका इलाज करेंगे।

सीएम भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री सीतारमण को लिखा पत्र, पत्र लिखकर की लघु एवं मध्यम व्यापारियों की राहत देने की बात की।

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रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर प्रदेश में वर्तमान में 9 अप्रैल से 6 मई की सुबह तक कंटैनमेंट जोन घोषित होने के कारण राज्य के लघु और मध्यम व्यवसायियों की परेशानियों को देखते हुए उन्हें वांछित राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है। श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डट्रीज के अनुरोध पर केन्द्र सरकार से मांग की है कि व्यवसायियों द्वारा विभिन्न प्रकार की विवरणियों को प्रस्तुत करने की अप्रैल एवं मई माह की तिथियों को दो माह के लिए बढ़ाया जाए साथ ही व्यवसाय संचालन हेतु लिए गए ऋण के मूलधन और ब्याज की किश्तों के भुगतान की समय-सीमा को कम से कम 3 माह की स्थगन अवधि प्रदान करने पर विचार किया जाए

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को पत्र में लिखा है कि – कोविड-19 महामारी की दूसरी और अधिक घातक लहर को रोकने के अंतिम प्रभावी कदम के रूप में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित लगभग सभी जिलों में दिनांक 9 अप्रैल से प्रारंभ कर 6 मई की सुबह तक पूर्ण कटेनमेंट जोन घोषित किये जाने के कारण राज्य में आर्थिक गतिविधियां एवं व्यापार-व्यवसाय लगभग बंद है। इससे राज्य में लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यवसायियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इस आर्थिक परेशानी में उनकी सहायता के उद्देश्य से कुछ फौरी राहतों की मांग की गई है, जिन पर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। 

  श्री बघेल ने लिखा है कि -अप्रैल माह वित्तीय वर्ष 2021-22 का प्रथम माह होने के कारण टीडीएस एवं टीसीएस एक्ट में कई अनुपालनों की तिथियां निर्धारित है। ऐसे समय में व्यवसायियों द्वारा अपने खातों का मिलान कर विभिन्न प्रकार की विवरणियों को निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इनके कार्यालयो, प्रतिष्ठानों में कार्यरत विभिन्न कर्मचारियों जैसे- एकाउंटेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रबंधन स्टाफ इत्यादि भी कोविड से संक्रमित होने के कारण या तो होम आइसोलेशन में है अथवा अस्पताल में हैं। इसी प्रकार व्यवसायियों के विभिन्न कर सलाहकार जैसे- चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, कर सलाहकार आदि भी इस महामारी से संक्रमित होने के कारण अपनी सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए चैम्बर द्वारा अनुरोध किया गया है कि अप्रैल एवं मई माह की विभिन्न तिथियों को आगामी 2 माह के लिये बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने लिखा है कि राज्य में वर्तमान में व्यापार-व्यवसायों के लगभग बंद होने जैसी स्थिति के कारण व्यवसाय एवं उद्योगों का नकदी प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है एवं वर्तमान स्थिति में सुधार में लगने वाले संभावित समय को ध्यान में रखते हुए व्यवसायियों के द्वारा विभिन्न बैंकों व वित्तीय संस्थाओं से लिये गये ऋण के मूलधन एवं ब्याज की वापसी में अत्यंत कठिनाई हो रही है। अतः चैम्बर द्वारा यह अनुरोध किया गया है कि उनके व्यवसाय संचालन हेतु लिये गये ऋण के मूलधन एवं ब्याज की किश्तों के भुगतान की समय-सीमा में कम से कम 3 माह की स्थगन अवधि प्रदान किये जाने पर विचार किया जाए।

श्री बघेल ने कहा है कि राज्य के चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा की गयी उपरोक्त दोनों मागों से राज्य शासन पूर्णतः सहमत है। ये दोनों ही विषय आपके मंत्रालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित है। आपदा के इस गंभीर समय में राज्य के लघु एवं मध्यम व्यवसायियों की परेशानियों को दृष्टिगत रखते हुए इन पर गंभीरता से एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार कर इन न्यायोचित मांगों पर शीघ सकारात्मक कदम उठाये जाने का आग्रह है। यह उपाय चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के व्यवसायियों को वांछित राहत प्रदान करने में काफी सहायक राज्य के चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा की गयी उपरोक्त दोनों मागों से राज्य शासन पूर्णतः सहमत है। ये दोनों ही विषय आपके मंत्रालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित है। आपदा के इस गंभीर समय में राज्य के लघु एवं मध्यम व्यवसायियों की परेशानियों को दृष्टिगत रखते हुए इन पर गंभीरता से एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार कर इन न्यायोचित मांगों पर शीघ सकारात्मक कदम उठाये जाने का आग्रह है। यह उपाय चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के व्यवसायियों को वांछित राहत प्रदान करने में काफी सहायक होंगे।