रमजान का पवित्र महीना चल रहा है रमजान के पवित्र महीने में महज 4 साल के मोहम्मद हसनैन शाह ने खुदा के लिए 14 से 15 घंटा भूखा प्यासा रह कर अपना पहला रोजा मुकम्मल कर लिया, मोहम्मद हसनैन शाह ने रोजा रखकर देश और विदेश में फैले कोरोना जैसे खतरनाक बीमारी से निजात पाने की भी दुआ की, मोहम्मद हसनैन शाह संजय नगर निवासी शामी शाह के पुत्र है महज 4 वर्ष की उम्र में खुदा की इबादत और लोगों की मदद और दुआ करने का जज्बा मोहम्मद हसनैन शाह ने अपने दादा मोहम्मद अतहर शाह के जरिए सीखा है इस छोटे बच्चे का रोजा रखकर खुदा की इबादत करना और समाज में फैली बुराई और बीमारियों के लिए दुआ करना वाकई तारीफ ए काबिल है खुदा से उम्मीद है कि मोहम्मद हसनैन शाह के रोजे और दुआ को कुबूल करें और देश में फैले कोरोना जैसे खतरनाक बीमारी से सब को निजात दे
सीएम बघेल ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के सभी विजेताओं को बधाई दी कहा- गर्व है कि योद्धा की तरह लड़े…
रायपुर: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं। हालांकि इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशानक रहा, लेकिन प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों और पार्टियों कों को बधाई दी है।
सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा है कि उनके द्वारा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण, लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्रों, तमाम अनैतिक कोशिशों के बावजूद इन विधानसभा चुनावों में हमारे कांग्रेस के प्रत्याशी जनता के मुद्दों पर डटे और अड़े रहे, विचलित नहीं हुए, योद्धा की तरह लड़े। हमें इस बात का गर्व है। पक्ष-विपक्ष के सभी विजेताओं को बधाई।
फतह मक्का 20 रमजान
20 रमज़ान सन 8 हिजरी मुताबिक़ 11 जनवरी 630 ईस्वी तारीखे नुबुव्वत का निहायत ही अजीमोशान और यादगार दिन है। इस्लाम मजहब का येह वोह सुनहरा पन्ना है कि जिसकी रौशनी से हर मोमिन क़ियामत के दिन तक ख़ुशी से चमकता रहेगा क्यूं कि ताजदारे दो आलम ﷺ ने इस तारीख से आठ साल पहले इनतिहाई रन्जीदगी के आलम में अपने साथियो को साथ ले कर रात की तारीकी में मक्के से हिजरत फ़रमा कर(क्योकि मक्के के काफिरो ने वहाँ के मुसलमानो का जीना हराम कर रखा था ) अपने वतने अज़ीज़ को खैरबाद कह दिया था और मक्के से निकलते वक्त खुदा के मुक़द्दस घर ख़ानए का’बा पर एक हसरत भरी निगाह डाल कर येह फ़रमाते हुए मदीने रवाना हुए थे कि “ ऐ मक्का ! खुदा की कसम ! तू मेरी निगाहे महब्बत में तमाम दुन्या के शहरों से ज़ियादा प्यारा है अगर मेरी क़ौम मुझे न निकालती तो मैं हरगिज़ तुझे न छोड़ता ।
” लेकिन आठ बरस के बाद येही वोह मसर्रत खेज़ तारीख़(दिन) है कि आप ﷺ ने एक फ़तेहे आ’ज़म की शानो शौकत के साथ इसी शहरे मक्का में आए और फ़रमाया और का’बतुल्लाह में दाखिल हो कर अपने सज्दों के जमालो जलाल से खुदा के मुक़द्दस घर की अज़मत को सरफ़राज़ फ़रमाया ।
कुफ्फारे कुरैश का अहद क्या था : – सुल्हे हुदैबिया के बयान के हिसाब से हुदैबिया के सुल्हनामे में एक येह शर्त भी दर्ज थी कि कबाइले अरब में से जो क़बीला कुरैश के साथ मुआहदा करना चाहे वोह कुरैश के साथ मुआहदा करे और जो हज़रत मुहम्मद ﷺ से मुआहदा करना चाहे वोह हज़रत मुहम्मद ﷺ के साथ मुआहदा करे ।
इसलिए इसी के कारण पर बनी बक्र कबीले ने कुरैश से आपसी मदद का मुआहदा कर लिया और बनी खुजाआ के कबीले ने रसूलुल्लाह ﷺ से आपसी मदद का मुआहदा कर लिया । ये दोनों कबीले मक्का के करीब ही में रहते थे थे लेकिन इन दोनों में काफी समय से कड़ी शत्रुता और मुखालफ़त(एक दूसरे के खिलाफ होना ) चली आ रही थी । एक मुद्दत से तो कुफ्फ़ारे कुरैश और दूसरे कबाइले अरब के कुफ्फार मुसलमानों से जंग करने में अपना सारा जोर आजमा रहे थे लेकिन सुल्हे हुदैबिया की बदौलत जब मुसलमानों की जंग कुफ़्फ़ारे कुरैश और दूसरे कुफ्फ़ार कबीले से रुकी तब बनी बक्र कबीले ने बनी खुज़ाआ कबीले से अपनी पुरानी दुश्मनी का बदला लेना चाहा और अपने सहयोगी कुफ्फारे कुरैश से मिल कर बिल्कुल अचानक तौर पर बनी खुजाआ कबीले पर हमला कर दिया और इस हमले में कुफ्फ़ारे कुरैश के तमाम रूअसा या’नी इकरिमा बिन अबी जल , सफ्वान बिन उमय्या व सुहैल बिन अम्र वगैरा बड़े बड़े सरदारों ने अलानिया बनी खुजाआ को क़त्ल किया । बेचारे बनी खुज़ाआ इस ख़ौफ़नाक ज़ालिमाना हम्ले की ताब न ला सके और अपनी जान बचाने के लिये हरमे का’बा में पनाह लेने के लिये भागे । बनी बक्र के अवाम ने तो हरम में तलवार चलाने से हाथ रोक लिया और हरमे इलाही का एहतिराम किया । लेकिन बनी बक्र का सरदार ” नौफ़ल ” इस क़दर जोशे इनतिकाम में आपे से बाहर हो चुका था कि वोह हरम में भी बनी खुजाआ को निहायत बे दर्दी के साथ क़त्ल करता रहा और चिल्ला चिल्ला कर अपनी कौम को ललकारता रहा कि फिर येह मौकअ कभी हाथ नहीं आ सकता । इसलिए उन दरिन्दा सिफ़त खूखार इन्सानों ने हरमे इलाही के एहतिराम को भी खाक में मिला दिया और हरमे का’बा की हुदूद में निहायत ही ज़ालिमाना तौर पर बनी खुजाआ का खून बहाया और कुफ्फ़ारे कुरैश ने भी इस क़त्लो गारत और कुश्तो खून में खूब, खूब हिस्सा लिया । ज़ाहिर है कि कुरैश ने अपनी इस हरकत से हुदैबिया के मुआहदे को अमली तौर पर तोड़ डाला । क्यूं कि बनी खुजाआ रसूलुल्लाह ﷺ से मुआहदा कर के आप के हलीफ़ बन चुके थे , इस लिये बनी खुजाआ पर हमला करना , येह रसूलुल्लाह ﷺ पर हम्ला करने के बराबर था । इस हम्ले में बनी खुजाआ में 23 आदमी कत्ल हो गए । इस हादिसे के बाद क़बीलए बनी खुजाआ के सरदार अम्र बिन सालिम खुजाई चालीस आदमियों का वपद ले कर फ़रयाद करने और मदद तलब करने के लिये मदीने बारगाहे रिसालत ﷺ में पहुंचे और येही फ़त्हे मक्का की तम्हीद हुई और इसी वजह से फत्ह मक्का का माअरका पेश आया ।कुरैश ने येह अहद शिकनी शा’बानुल मुअज्जम 8 सिने हिजरी में सुल्हे हुदैबिय्या के 22 माह के बाद की । यहा जो गजवा हुआ इस ग़ज़वे को ” ग़ज़वए फ़त्हे मक्का ” कहा जाता है और मुसलमानों की येह अज़ीम तरीन फ़त्ह है कि इस के साथ अल्लाह ने अपने महबूबﷺ और अपने दीन को गलबा अता फ़रमाया , इसलिए , इस के बाद अर्जे हिजाज़ में कोई काफ़िर न रहा । येह गज़वा रमज़ानुल मुबारक में हुवा और इस पर उलमाए किराम का इत्तिफ़ाक़ है ।इससे पहले अहले अरब इस बात का इन्तिज़ार कर रहे थे कि अगर हुजूर नबिय्ये रहमत , शफ़ीए उम्मतﷺ मक्कए मुकर्रमा पर फ़त्ह हासिल कर लें तो वोह भी दाइरए इस्लाम में दाखिल हो जाएं। , इसलिए , जब येह फ़त्हे अज़ीम जुहूर पज़ीर हुई तो लोग दौड़ते हुवे इस्लाम लाने लगे । इस फ़तह के बा’द मुशरिकों के लिये कोई जगह बाकी न रही ।
रब ने इस फ़तह के जरीए अपने दीन को गालिब फ़रमाया और अपने हबीबﷺ को मुज़फ्फ़र व फ़तहमन्द फ़रमा दिया ।
LOCKDOWN बढ़ेगा!… किराना दुकानों,नाई और इलेक्ट्रीशियन को मिल सकती है राहत…
रायपुर। राजधानी में कोरोना की स्थिति बेकाबू होने के बाद प्रशासन द्वारा टोटल दुकानें बंद कर दी गई थीं। राशन-किराना से सब्जी दुकान तक बंद थीं जिसका परिणाम ये हुआ की संक्रमण के आकड़े थोड़े काम हुए 15 दिन पहले जहाँ संकरमितो के सरकारी आकड़े करीब 3000 हजार से अधिक थी अब हालत थोड़े काबू में दिख रहे हैं आँकड़े कम होने पर भी प्रशाशन द्वारा सख्ती दिखते हुए एक हफ्ते का लॉकडाउन और बढ़ने की सम्भावना है ,लेकिन कुछ रियायतों के साथ पाबंदियों में छूट मिल सकती है। शादी और जरूरी सामान की दुकानों को शर्ताें के साथ खोलने की छूट मिल सकती है। इसे लेकर पुलिस-प्रशासन होमवर्क कर रहा है। चार मई के पहले लॉकडाउन बढ़ाने और कारोबारीयों काे छूट देने पर फैसला हो सकता है।
इसलिए खुल सकतीं हैं दुकाने
बीते हफ्तेभर से रोज पॉजिटिव मरीजों की संख्या में कमी आ रही है, जिससे संभावना है, जरूरी और शादी सामान से जुड़ी दुकानों को शर्तों के साथ खोलने की छूट मिल सकती है। अनाज को भी रियायतें जानकारी के मुताबिक वर्तमान में किराना और अनाज को हाेम डिलीवरी की छूट मिली है, फिर भी पब्लिक को नहीं मिल पा रहा। कारोबारी भी समय और शर्ताें के साथ दुकान खोलने छूट की मांग कर चुके हैं। इसे लेकर भी होमवर्क चल रहा है। उम्मीद हैं, इन्हें कुछ और रियायत मिल सकती है।
22 दिनों से शहर लॉक
जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी रोकने कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन ने 9 अप्रैल से 19 अप्रैल तक पहली बार लॉकडाउन किया था, लेकिन संक्रमण जिसकी अवधि को बढ़ाकर 25 अप्रैल और फिर 6 मई की सुबह 6 बजे तक किया गया है। अब लॉकडाउन को हफ्तेभर और बढ़ाया जा सकता है।
इन्हें मिल सकती है छूट
जानकारी के मुताबिक गर्मी सीजन में अधिकतर रहवासियों के कूलर और पंखे मरम्मत करने लायक हो गए हैं। बिजली बल्ब से लेकर तार तक की जरूरतें बढ़ गई हैं। शादी के लिए कपड़ा से लेकर सेहरा तक नहीं मिल रहा। यही नहीं, बाल कटिंग कराने पब्लिक को परेशानी हो रही है। बाइक पंचर व रिपेयरिंग की परेशानी बढ़ गई है। इन सभी बिंदुओं पर शासन-प्रशासन स्तर पर होमवर्क चल रहा है। उम्मीद है, इन्हें शर्ताें के साथ 6 मई से छूट मिल सकती है।
बीते 24 घंटे में देश में कुल 3.5 लाख से ज्यादा केस… 3000 से अधिक मौतें…
देश में रविवार को संक्रमण के मामलों में मामूली कमी देखी गई। फिर भी 24 घंटों में 3.64 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 3,300 मौतें भी हुई। रविवार रात 12.45 बजे तक मिली जानकारी के अनुसार 3,64,910 नए मामले आने से संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,99,14,633 हो गई। वहीं 3,300 और लोगों की मौत के साथ अब तक कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 2,18,824 हो गई।
देश में 34,11,350 सक्रिय मामले
मौजूदा वक्त में देश में 34,10,161 सक्रिय मामले हैं। इस अवधि में 2,95,154 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी गई। इस तरह अब तक 1,62,77,092 लोग इस बीमारी को मात दे चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार सुबह आठ बजे जो आंकड़े जारी किए उनके अनुसार बीते 24 घंटों में 3,689 लोगों की कोरोना से मौत होने की जानकारी सामने आई। इस बीच सक्रिय मामलों की संख्या 33, 49,644 हो गई है। यह संक्रमण के कुल मामलों का 17.13 फीसद है।
मेडिकल के पीछे खोला हॉस्पिटल प्रसासन ने किया सील
नज़ारा देखकर होश उड़ जाएंगे
अंबिकापुर शहर के चठिरमा में एक मेडिकल स्टोर में मेडिकल स्टोर संचालन के साथ ही अनाधिकृत रूप से हॉस्पिटल खोल कर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। सस्ते इलाज के कारण वहां काफी संख्या ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के मरीज इलाज कराने आने लगे । जिसका पता चलते ही प्रशासन ने दबिश दी।
सरगुजा कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशानुसार एसडीएम प्रदीप कुमार साहू के नेतृत्व में प्रशासन की टीम द्वारा चठिरमा स्थित व्यापारी मेडिकल स्टोर में दबिश देकर छापामार कार्यवाही की गई। कार्यवाही के दौरान स्टोर संचालक अजीत व्यापारी द्वारा मेडिकल स्टोर में अनाधिकृत रूप से मरीजों का उपचार करते पाया गया।
मेडिकल स्टोर्स से संलग्न मकान में 9 बेड की व्यवस्था तथा ग्लूकोज बॉटल चढ़ाए जाने के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए। अजीत व्यापारी द्वारा बीएएमएस की डिग्री प्रस्तुत की गई, जिसका नवीनीकरण नही किया गया है। मेडिकल स्टोर्स के आस-पास बहुत सारे मेडिकल वेस्ट लापरवाही पूर्वक खुले में फेंके गए थे।
व्यापारी मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा अनाधिकृत रूप से मरीजों का इलाज करना और मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन में घोर लापरवाही बरतने पर उक्त भवन को एसडीएम द्वारा सील कर दिया गया है।
स्टोर के पीछे बने रूम में जमीन पर चटाई बिछे हुए थे तथा दीवारों पर बोतलें टंगी थीं। यह देख टीम भी हैरान रह गई। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद जिला प्रशासन की टीम द्वारा छापामार कार्यवाही कर भवन को सील कर दिया गया।
मेडिकल स्टोर को सील करने में तहसीलदार ऋतुराज बिसेन, नायब तहसीलदार किशोर वर्मा तथा नवापारा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आयुष जायसवाल मौजूद थे।
चठिरमा स्थित जिस मेडिकल स्टोर सह डिस्पेंसरी को प्रशासन द्वारा सील किया गया है, वहां काफी संख्या ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के मरीज इलाज कराने आते थे। काफी सस्ते दर पर यहां मरीजों का इलाज किया जाता था।
अब निःशुल्क ऑक्सीजन मरीजो के घर और राशन पहुचेगा गरीबो के घर दुख के साथी श्री बघेल ने शुरू की 3 योजनाए
रायपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर नगर निगम की तीन महत्वपूर्ण सेवाओं का ऑनलाइन शुभारंभ किया। उन्होंने ‘ऑक्सीजन ऑन व्हील्स नाम से होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर की घर पहुंच सेवा, कोरोना मरीजों को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर लाने-ले जाने के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा और जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क सूखा राशन वितरण कार्य का शुभारंभ किया। महापौर एजाज ढेबर, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू और रायपुर नगर निगम के आयुक्त सौरभ कुमार भी वर्चुअल शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री बघेल ने तीनों सेवाओं की शुरूआत करते हुए कहा कि कोरोना काल और लॉक-डाउन में रायपुर नगर निगम लोगों को सुविधाएं पहुंचाने के लिए तत्परता और जिम्मेदारी से काम कर रहा है। कोरोना पीडि़तों के इलाज के लिए इंडोर स्टेडियम को अस्पताल के रूप में तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब अनेक राज्यों में कोरोना के मरीजों के लिए ऑक्सीजन की मारामारी है, छत्तीसगढ़ में इसकी घर पहुंच सुविधा शुरू की जा रही है। उन्होंने लोगों को मजदूर दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीं। बघेल ने इनडोर स्टेडियम में शुभारंभ कार्यक्रम में मौजूद महापौर एजाज ढेबर को भी जन्मदिन की बधाई दी।
रायपुर नगर निगम द्वारा लॉक-डाउन अवधि में निर्धन परिवारों के लिए खाद्यान्न वितरण की आज शुरूआत की गई। कोरोना काल में लॉक-डाउन से प्रभावित जरूरतमंद परिवारों में वितरण के लिए सात हजार पैकेट सूखा राशन गाडिय़ों में भरकर रवाना किया गया। स्थानीय पार्षदों और जोन अधिकारियों के साथ समन्वय कर इन्हें नगर निगम क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों में नि:शुल्क वितरित किया जाएगा। कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित चिकित्सा सुलभ कराने रायपुर नगर निगम द्वारा सर्वसुविधायुक्त एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
कोरोना संक्रमितों को नि:शुल्क घर पहुंच आक्सीजन सुविधा उपलब्ध कराने नगर निगम द्वारा ‘ऑक्सीजन ऑन व्हील्स शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत होम आइसोलेशन में रह रहे ऐसे मरीज जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन सामान्य से कम है एवं जिन्हें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से सहायता दी जा सकती है, उन मरीजों को नि:शुल्क घर पहुंच सेवा के जरिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराया जाएगा। होम आईसोलेशन की टीम ऐसे मरीजों के स्वास्थ्य की नियमित जानकारी लेगी एवं मरीज के निवास स्थल पर पुन: पहुंच कर उपलब्ध कराए गये कंसंट्रेटर वापस प्राप्त करेगी।
आखिर कब खुलेगा बम्हनी हत्या का राज , 4 अलग एंगल से पुलिस कर रही तफ्तीश
महासमुंद । 26 मार्च को बम्हनी में हुए महिला के अंधे कत्ल की गुत्थी कोतवाली पुलिस अब तक नहीं सुलझ पाई है। पुलिस मामले में परिजनों और ग्रामीणों समेत लगभग 50 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है लेकिन अभी तक हत्या का सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए हर एंगल से जांच कर रही है।
एसडीओपी नारद सूर्यवंशी और थाना प्रभारी शेर सिंह बंदे ने बताया कि मामला अभी विवेचना में है। जमीन, अवैध संबंध, परिवारिक विवाद के साथ-साथ चार अलग -अलग एंगल से जांच की जा रही है। हालांकि सभी मामलों में जांच के बाद कुछ नहीं मिल पाया है जिसमें हत्या की वजह और हत्या करने वाले का सुराग मिल पाए।
अभी टीम को एक मुद्दे में कुछ क्लू मिलने का संदेह है जिस पर जांच की जा रही है। हालांकि इसे फिलहाल बताना संभव नहीं है। प्रयास जारी है इस अंधे कत्ल की गुत्थी जल्द से जल्द सुलझाई जा सके। ज्ञात हो कि बीते 26 मार्च की रात अज्ञात ने ग्राम बम्हनी में घर घुसकर रसोई घर में खाना बना रहीं संतोषी यादव की धारदार हथियार से हत्या कर दी।
घटना की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी। मामले में फारेंसिंक और डॉग स्क्वायड की टीम भी मौके की जांच कर चुकी है। बावजूद कोई सुराग नहीं मिल पाया है। कोतवाली पुलिस अलग-अलग मामले को सुलझाने का प्रयास कर रही है।
क्या आप जानते हैं पवित्र माहे रमजान कब से मनाया जाता हैं और इस्लाम धर्म में इसकी क्या मान्यताएँ हैं
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक नौवां महीना रमजान का होता है। रमजान के पवित्र महीने में मुसलमान लोग रोजा रखते हैं। इस दौरान सूरज निकलने से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी खाया-पीय नहीं जाता है। रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है। इसमें हर नेकी का कई गुना सवाब मिलता है। इसलिए इस दौरान कहा जाता है कि रमजान के दिनों में हर रोजेदार को बुरी आदतों से दूर रहना होता है।
परंतु क्या आप जानते हैं कि रमजान की शुरुआत कब से हुई? और इस्लाम धर्म में इसकी क्या मान्यता है? यदि नहीं तो आगे इसे जानिए।इस्लामिक मान्यता के अनुसार मोहम्मद साहब को साल 610 ईस्वी में लेयलत-उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुअरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ। कहते हैं कि उसी समय से रमजान को इस्लाम धर्म के पवित्र महीने के तौर पर मानाया जाने लगा। इसके अलावा रमजान के पवित्र महीने के बारे में कुरान में लिखा है कि अल्लाह ने पैगम्बर साहब को अपने दूत के रूप में चुना था। इसलिए लिहाज से यह पवित्र माह हर मुसलमानों के लिए खास है। इस्लाम यह कहता है कि रमजान के दौरान रोजे रखने का मतलब केवल यह नहीं होता कि रोजेदार भूखे-प्यासे रहें। बल्कि, इस दौरान मन में बुरे विचार न आने देने के लिए भी कहा गया है।
रमजान में मुसलमान को किसी की बदनामी करने, लालच करने, झूठ बोलने और झूठी कसम खाने से बचना चाहिए। साथ ही साथ मान्यता है कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुले रहते हैं और जो लोग रोजे रखते हैं उसे ही जन्नत नसीब होती है। पैंगम्बर मुहम्मद साहब के मुताबिक रमजान महीने का पहला अशरा (दस दिन) रहमत का होता है। जबकि दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा दोजख से आजादी दिलाने वाला होता है। इसलिए रमजान में हर मुसलमान के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है।
इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक और घटना कोरोना संक्रमित मरीज की मौत पर परिजनों को 11 लाख रुपए का बिल थमा दिया। बिल न देने पर अस्पताल ने शव देने से इनकार।
इस संक्रमण काल में जहाँ लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है जिन्दा रहने पर दवाई और ऑक्सीजन की परेशानी और मौत के बाद अस्पताल के मनमाने बिल की समस्या। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को 11 लाख रुपए का बिल थमा दिया और बिल नहीं चुकाने पर अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया है.
मामला इंदौर शहर के एप्पल अस्पताल का है अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना मरीज के उपचार का बिल 11 लाख का बनाया है. संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों को शव देने से इनकार कर दिया,मरीज के परिजन कर्ज लेकर 7 लाख 60 हजार रुपये अस्पताल में जमा करवा चुके हैं। अस्पताल के इस रवैए के बाद मृतक की दो बेटी सहित पत्नी रोती बिलखती रही पर अस्पताल प्रबंधन बकाया बिल की राशि 4 लाख और जमा कराने के बाद ही शव देने की बात पर अड़ा हुआ है।
फिर भी मध्यप्रदेश की सरकार के कानो में जूं तक नहीं रेंगी ये सरकारें केवल चुनाव के समय संवेदनशील होती हैं।










